टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। उपखंड क्षेत्र के नीमेडा गांव में सडक़ चौड़ीकरण कार्य के दौरान प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्रवाई विवादों में घिर गई है। सडक़ निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में करीब दो दर्जन मकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद ग्रामीणों ने पी डब्लू डी प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोडक़र आम लोगों के मकानों पर कार्रवाई की गई, जिससे कई परिवार बेघर जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार मुण्डिया कलां मार्ग से देवगांव तक सडक़ निर्माण कार्य चल रहा है। सडक़ को निर्धारित मानकों के अनुसार चौड़ा किया जाना है। इसी क्रम में प्रशासन, पुलिस जाब्ते और जेसीबी मशीनों की सहायता से उन निर्माणों को हटाया गया जो सडक़ की सीमा में आ रहे थे। कार्रवाई के दौरान कई पक्के मकान भी तोड़ दिए गए। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता ने बताया कि मुण्डिया कलां रास्ते से देवगांव तक लगभग 4 किलोमीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सडक़ का निर्माण किया जा रहा है। करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए टेंडर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया था। गांव में कुछ मकान निर्धारित सीमा के भीतर आने के कारण उन्हें नियमानुसार हटाया गया। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण शिवजी लाल जांगिड़, प्रहलाद धाकड़, सीताराम विजय और देवलाल धाकड़ सहित अन्य लोगों का आरोप है कि सडक़ के दोनों ओर सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी अतिक्रमणों को हटाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और द्वेषता के चलते कुछ लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जबकि अन्य लोगों के पक्के मकानों तक को तोड़ दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार कार्रवाई में गोपीलाल धाकड़, सीताराम विजय, गोपाल धाकड़, श्योजी धाकड़, गोपी नाई, सांवरलाल धाकड़, शिवजीलाल जांगिड़, महावीर धाकड़, दुर्गालाल बलाई, देवलाल धाकड़, शंकरलाल धाकड़, रामचरण शर्मा, हेमराज धाकड़, मुरली मनोहर शर्मा, शंकरलाल माली, खुशीराम माली, मोटू माली सहित कई लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा। प्रभावित परिवारों का कहना है कि मकान टूटने से उनके सामने रहने, खाने-पीने और दैनिक जीवन की गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर समान रूप से कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं सडक़ निर्माण परियोजना को लेकर गांव में अब असंतोष और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। उपखंड क्षेत्र के नीमेडा गांव में सडक़ चौड़ीकरण कार्य के दौरान प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्रवाई विवादों में घिर गई है। सडक़ निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में करीब दो दर्जन मकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद ग्रामीणों ने पी डब्लू डी प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के निर्माणों को छोडक़र आम लोगों के मकानों पर कार्रवाई की गई, जिससे कई परिवार बेघर जैसी स्थिति में पहुंच गए हैं। जानकारी के अनुसार मुण्डिया कलां मार्ग से देवगांव तक सडक़ निर्माण कार्य चल रहा है। सडक़ को निर्धारित मानकों के अनुसार चौड़ा किया जाना है। इसी क्रम में प्रशासन, पुलिस जाब्ते और जेसीबी मशीनों की सहायता से उन निर्माणों को हटाया गया जो सडक़ की सीमा में आ रहे थे। कार्रवाई के दौरान कई पक्के मकान भी तोड़ दिए गए। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता ने बताया कि मुण्डिया कलां रास्ते से देवगांव तक लगभग 4 किलोमीटर लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सडक़ का निर्माण किया जा रहा है। करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए टेंडर जारी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया गया था। गांव में कुछ मकान निर्धारित सीमा के भीतर आने के कारण उन्हें नियमानुसार हटाया गया। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीण शिवजी लाल जांगिड़, प्रहलाद धाकड़, सीताराम विजय और देवलाल धाकड़ सहित अन्य लोगों का आरोप है कि सडक़ के दोनों ओर सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी अतिक्रमणों को हटाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका कहना है कि राजनीतिक प्रभाव और द्वेषता के चलते कुछ लोगों के निर्माणों को छोड़ दिया गया, जबकि अन्य लोगों के पक्के मकानों तक को तोड़ दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार कार्रवाई में गोपीलाल धाकड़, सीताराम विजय, गोपाल धाकड़, श्योजी धाकड़, गोपी नाई, सांवरलाल धाकड़, शिवजीलाल जांगिड़, महावीर धाकड़, दुर्गालाल बलाई, देवलाल धाकड़, शंकरलाल धाकड़, रामचरण शर्मा, हेमराज धाकड़, मुरली मनोहर शर्मा, शंकरलाल माली, खुशीराम माली, मोटू माली सहित कई लोगों के मकानों को नुकसान पहुंचा। प्रभावित परिवारों का कहना है कि मकान टूटने से उनके सामने रहने, खाने-पीने और दैनिक जीवन की गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर समान रूप से कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं सडक़ निर्माण परियोजना को लेकर गांव में अब असंतोष और चर्चा का माहौल बना हुआ है।

