देवली (सच्चा सागर)। 12वीं कक्षा में कॉमर्स विषय के प्रति रुचि और एक प्रतिष्ठित पेशेवर बनने की दृढ़ इच्छाशक्ति ने मिथिल सिंहल को सीए बनने का चुनौतीपूर्ण मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की एकाग्रता और अवधारणाओं को समझने पर विशेष ध्यान देकर अपनी तैयारी की रणनीति बनाई। पढ़ाई के दौरान उन्होंने योग और ध्यान का सहारा लिया, जो सीए जैसे विस्तृत पाठ्यक्रम के दबाव को झेलने में सहायक हुआ। जीवन के सबसे कठिन दौर में अपने पिता अजय सिंहल के असामयिक निधन के बावजूद मिथिल ने हार नहीं मानी और परिवार ने उनके लिए एक सुरक्षा कवच बनकर पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी। इस उपलब्धि पर मधुसूदन सिंहल, संजय सिंहल और माता गार्गी सिंहल सहित परिवार में खुशी है। परिवार इसे सिंघल परिवार के संघर्षों और एकता की जीत मानते हुए कहता है कि मिथिल ने अपने पिता का सपना पूरा कर परिवार का मान बढ़ाया है। अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और माता के आशीर्वाद को दिया। मिथिल अब एक कुशल पेशेवर के रूप में कॉर्पोरेट जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं।
देवली (सच्चा सागर)। 12वीं कक्षा में कॉमर्स विषय के प्रति रुचि और एक प्रतिष्ठित पेशेवर बनने की दृढ़ इच्छाशक्ति ने मिथिल सिंहल को सीए बनने का चुनौतीपूर्ण मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की एकाग्रता और अवधारणाओं को समझने पर विशेष ध्यान देकर अपनी तैयारी की रणनीति बनाई। पढ़ाई के दौरान उन्होंने योग और ध्यान का सहारा लिया, जो सीए जैसे विस्तृत पाठ्यक्रम के दबाव को झेलने में सहायक हुआ। जीवन के सबसे कठिन दौर में अपने पिता अजय सिंहल के असामयिक निधन के बावजूद मिथिल ने हार नहीं मानी और परिवार ने उनके लिए एक सुरक्षा कवच बनकर पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी। इस उपलब्धि पर मधुसूदन सिंहल, संजय सिंहल और माता गार्गी सिंहल सहित परिवार में खुशी है। परिवार इसे सिंघल परिवार के संघर्षों और एकता की जीत मानते हुए कहता है कि मिथिल ने अपने पिता का सपना पूरा कर परिवार का मान बढ़ाया है। अपनी इस सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और माता के आशीर्वाद को दिया। मिथिल अब एक कुशल पेशेवर के रूप में कॉर्पोरेट जगत में अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं।
