47 करोड़ की सडक़ या विवादों का रास्ता!


जल निकासी से चरागाह तक, पीडब्ल्यूडी और निर्माण एजेंसी पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। विकास की राह पर दौडऩे वाली सडक़ अब सवालों के गड्ढों में घिरती नजर आ रही है। उपखंड क्षेत्र में स्टेट हाईवे-37ए पर गुर्जर की थड़ी से पंद्राहेड़ा होते हुए बावड़ी तक लगभग 47 करोड़ 50 लाख रुपए की लागत से चल रहे सडक़ सुदृढ़ीकरण कार्य को लेकर ग्रामीणों और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के बीच विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस सडक़ को क्षेत्र के विकास का मार्ग बनना था, वह प्राकृतिक संसाधनों और सरकारी नियमों के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है।    

सडक़ बनी तो पानी जाएगा कहां? ग्रामीणों ने उठाए सवाल

रिण्डल्या से पंद्राहेड़ा के मध्य सडक़ निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान पुराने जल प्रवाह मार्गों को बाधित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सिंचाई विभाग के पंद्राहेड़ा तालाब के जलभराव क्षेत्र में भी सडक़ निर्माण किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई तो आने वाले समय में बारिश का पानी अपना रास्ता तलाशता फिरेगा और जल संरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। लोगों ने इस मामले में जल स्रोतों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की सुरक्षा संबंधी उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के निर्देशों की पालना करने की मांग उठाई है।

चारागाह की मिट्टी बनी सडक़ की साथी, मवेशियों का कौन बनेगा रखवाला?

ग्रामीणों का आरोप है कि सडक़ निर्माण सामग्री के लिए आसपास की चारागाह भूमि से बिना आवश्यक अनुमति मिट्टी खुदाई की गई। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कंपनी द्वारा सडक़ के दोनों ओर करीब 100 मीटर क्षेत्र में लगभग 10-10 फीट गहरे गड्ढे और खाइयां बना दी गई हैं। लोगों का कहना है कि जिस चारागाह में कभी पशु आराम से चरते थे, वहां अब गहरे गड्ढों का जाल बिछ गया है, जिससे पशुओं और राहगीरों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सडक़ निर्माण में मिट्टी भराई के लिए अलग बजट उपलब्ध होने के बावजूद चरागाह भूमि को नुकसान पहुंचाया गया। 

सडक़ का रास्ता बदल रहा या नियमों का नक्शा?

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले से मौजूद सडक़ के स्थान पर नए एलाइनमेंट के आधार पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। साथ ही परियोजना के लेआउट में बार-बार बदलाव किए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार इन परिवर्तनों से सरकारी धन के उपयोग और परियोजना की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना में हर कदम नियमानुसार और पारदर्शी होना चाहिए, क्योंकि सडक़ सिर्फ पत्थर और डामर से नहीं बल्कि जनता के पैसे से तैयार होती है। 

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पूरे सडक़ निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने, कथित अनियमितताओं की जांच करने तथा न्यायालयों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें सडक़ निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि विकास कार्य पर्यावरण, जल स्रोतों और सरकारी नियमों की अनदेखी किए बिना पूरे किए जाएं। अब निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं कि करोड़ों की इस सडक़ परियोजना पर उठे सवालों का जवाब किस प्रकार सामने आता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विकास की यह सडक़ जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के लिए जवाबदेही की राह भी बन सकती है।        


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