गरीब किसान की बेटी मनीषा मीणा ने रचा इतिहास, 97.60 प्रतिशत अंकों के साथ बनी विद्यालय टॉपर


- सलीम खान

अलीगढ़ (सच्चा सागर)। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बारहवीं का रिजल्ट जारी होने के साथ ही अलीगढ़ तहसील क्षेत्र के रिजोदा ग्राम पंचायत के पचाली की छात्रा मनीषा मीणा ने कला वर्ग (आर्ट्स) में 97.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए गांव व विद्यालय का नाम रोशन किया गया। छात्रा मनीषा मीणा वर्तमान में पचाला महात्मा गांधी राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय में कक्षा बारहवीं कक्षा में अध्ययनरत थी। छात्रा मनीषा मीणा की यह कामयाबी किसी सुख-सुविधा या महंगे संसाधनों की देन नहीं है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी मनीषा मीणा के पिता भेरुलाल मीना दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर परिवार का गुजर-बसर करते हैं। घर की आर्थिक तंगी और संसाधनों के अभाव के बीच छात्रा मनीषा मीणा ने कभी हार नहीं मानी। जहाँ आज के दौर में छात्र डिजिटल गैजेट्स और भारी-भरकम ट्यूशन फीस पर निर्भर हैं। वहीं पचाली गांव की इस लाडली ने सरकारी स्कूल की टाट-पट्टियों पर बैठकर और अपने पिता के संघर्ष को अपनी प्रेरणा बनाकर किताबों से ऐसी दोस्ती की कि आज सफलता खुद उसके कदम चूम रही है। मनीषा की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे उसके पिता भेरुलाल मीना का वो अटूट विश्वास भी है। उसकी इस एकाग्रता और गुरुजनों के सटीक मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि आज उसके सिर पर राजस्थानी आन-बान-शान का प्रतीक ‘साफा’ बंधा है और पूरा गांव उसे अपनी पलकों पर बिठा रहा है। इस सफलता का इनाम भी अब ‘आसमानी’ होने वाला है। भामाशाह लोकेश मीणा पुत्र रामसागर मीणा द्वारा 26 जनवरी को किए गए उस ऐतिहासिक संकल्प के अनुसार, मनीषा और उसकी छ: सहपाठी छात्राएं अब बहुत जल्द अपनी पहली हवाई यात्रा पर निकलेगी। यह हवाई सफर केवल एक गांव से दूसरे शहर तक का नहीं होगा, बल्कि यह उन हजारों ग्रामीण बेटियों के सपनों की उड़ान होगी जो अभावों में रहकर भी कुछ बड़ा करने का जज्बा रखती हैं। बुधवार को आयोजित सम्मान समारोह में मनीषा के पिता की आँखों में खुशी के आँसू छलके, तो मानो सारा संघर्ष धुल गया। मनीषा की यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि मेहनत पसीने से सींची जाए, तो सफलता का फल हमेशा मीठा और गौरवमयी होता है।   


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने