टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। उपखण्ड क्षेत्र की पंचायत मान्दोलाई के ग्राम खेजड़ों का बास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत धारण के प्रसङ्गों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। व्यासपीठ से सन्त अवधेश दास महाराज (केशव गोपाल गौशाला, सांपला) ने अपने ओजस्वी वाणी से भगवान के गोकुल से लेकर वृंदावन तक के सफर का सजीव चित्रण किया। महाराज ने बताया कि कैसे नन्हे कान्हा ने अपनी माखनचोरी और बाल सुलभ चेष्टाओं से सम्पूर्ण गोकुल को आनन्दित किया। पूतना वध और शकटासुर उद्धार के प्रसंगों के माध्यम से भगवान के रक्षक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया।यमुना को विष मुक्त करने के लिए कालिया नाग के फन पर नटवर नागर का नृत्य देख पांडाल जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूँज उठा। यह प्रसंग अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। कथा का मुख्य आकर्षण गिरिराज उत्सव रहा। महाराज श्री ने प्रसंग सुनाया की कैसे भगवान ने ब्रजवासियों को प्रकृति की पूजा का संदेश दिया और देवराज इंद्र के अहंकार को चकनाचूर करने के लिये सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा रुकवाकर कर्म और प्रकृति की महत्ता को स्थापित किया। गिरिराज धरन हमें सिखाते हैं कि शरण में आये भक्त की रक्षा के लिये ईश्वर स्वयं कष्ट उठाते हैं। आयोजक रणजीत सिंह, डॉ. जगवीर सिंह, डॉ. राजवीर सिंह, भानुप्रताप सिंह, अंशु सिंह ने सभी क्षेत्रवासियों से धार्मिक आयोजन में पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। उपखण्ड क्षेत्र की पंचायत मान्दोलाई के ग्राम खेजड़ों का बास में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिवस भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत धारण के प्रसङ्गों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। व्यासपीठ से सन्त अवधेश दास महाराज (केशव गोपाल गौशाला, सांपला) ने अपने ओजस्वी वाणी से भगवान के गोकुल से लेकर वृंदावन तक के सफर का सजीव चित्रण किया। महाराज ने बताया कि कैसे नन्हे कान्हा ने अपनी माखनचोरी और बाल सुलभ चेष्टाओं से सम्पूर्ण गोकुल को आनन्दित किया। पूतना वध और शकटासुर उद्धार के प्रसंगों के माध्यम से भगवान के रक्षक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया।यमुना को विष मुक्त करने के लिए कालिया नाग के फन पर नटवर नागर का नृत्य देख पांडाल जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूँज उठा। यह प्रसंग अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। कथा का मुख्य आकर्षण गिरिराज उत्सव रहा। महाराज श्री ने प्रसंग सुनाया की कैसे भगवान ने ब्रजवासियों को प्रकृति की पूजा का संदेश दिया और देवराज इंद्र के अहंकार को चकनाचूर करने के लिये सात दिनों तक अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण किया। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा रुकवाकर कर्म और प्रकृति की महत्ता को स्थापित किया। गिरिराज धरन हमें सिखाते हैं कि शरण में आये भक्त की रक्षा के लिये ईश्वर स्वयं कष्ट उठाते हैं। आयोजक रणजीत सिंह, डॉ. जगवीर सिंह, डॉ. राजवीर सिंह, भानुप्रताप सिंह, अंशु सिंह ने सभी क्षेत्रवासियों से धार्मिक आयोजन में पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
