होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन का पुराणिक महत्व के साथ सामाजिक महत्व भी है। आचार्य कृष्ण बिहारी दाघिच ने कहा कि होलिका दहन करने से आसुरी व नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। होली का पर्व हमें बताता है कि हमेशा बुराई का अंत होना निश्चित है। युवा दिमान्शू जांगिड ने कहा कि इस होलिका दहन पर हम अपने भीतर के अहंकार, देष, ईर्षा, क्रोध और समस्त विकारों को अग्नि में समर्पित कर दें तथा प्रेम समरसता, सद्भाव और भाईचारे के रंगों से अपने जीवन को रंग दे।
होलिका दहन में ये चीज डालने से होता है अचूक लाभ
गोबर के उपले: होलिका में डालने से नकारात्मक शक्ति समाप्त होती हैं।कपूर, पान, लौंग: का जोड़ा डालने से रोग से मुक्ति मिलती है। सूखा नारियल: डालने से लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं। अलसी का तेल: गोले में भरकर डालने से राहु-केतु दोष से शांति होती है। चंदन की लकड़ी: डालने से घर में सुख-समृद्धि होती है। काले तिल: डालने से घर की बीमारी समाप्त होती है और सभी दोष समाप्त होते हैं। गेहूं की बाली: डालने से कभी भी घर में अन्न की कमी नहीं होती है। हवन सामग्री, हल्दी की गांठ: डालने से विवाह के योग बनते हैं। होलिका दहन मे सैकड़ो की संख्या में युवाओं और बुजुर्गों सहित महिलाओं ने भाग लिया। भक्त प्रहलाद के प्रतीक होली के डाडे को काटकर बचाया गया। घरों में पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाया गया। जिन घरों में पहली बार बालक का जन्म हुआ वहां पर होली की ढुढ बनाई गई। त्योहार के मध्य नजर बाजार में भी सुबह से ही रौनक बनी रही। फूले, पतासे, मिठाई, फूलमालाओं एव रंग गुलाल की जमकर खरीदारी हुई। उपखंड क्षेत्र के ढिक़ोलिया, बालिथल, खतौली, डाबला सहित अनेक गांव से होली का पर्व सदा पूर्वक मनाने के समाचार प्राप्त हुए हैं।
