भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग, श्रद्धालु भावविभोर


रानोली  (सच्चा सागर)।
बगड़वा बालाजी महाराज मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के आठवें दिन व्यास आचार्य राजेश शास्त्री (जयसिंहपुरा) ने उद्धव-गोपी संवाद एवं भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी, विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं, जो अत्यंत सुंदर और भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने बिना देखे ही श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया और उनके गुणों से प्रभावित होकर संदेश भेजा, जिसमें शिशुपाल से तय विवाह को टालने हेतु श्रीकृष्ण से उनका हरण करने की प्रार्थना की। कथा में बताया गया कि श्रीकृष्ण विदर्भ पहुंचे और स्वयंवर से पूर्व मंदिर में रुक्मिणी को अपने रथ में बैठाकर ले गए। इस दौरान रुक्मी और शिशुपाल सहित अन्य राजाओं से युद्ध हुआ, जिसमें श्रीकृष्ण ने विजय प्राप्त कर रुक्मिणी को द्वारका ले जाकर विधिपूर्वक विवाह किया। विवाह अवसर पर द्वारका नगरी को भव्य रूप से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। आचार्य ने कहा कि यह प्रसंग प्रेम, श्रद्धा और शौर्य की विजय का प्रतीक है। साथ ही महारास प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का भी विस्तार से वर्णन किया गया। कथा के दौरान कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने विवाह गीत गाए और भावपूर्वक कन्यादान भेंट अर्पित की, जिससे पूरा परिसर भक्ति रस में सराबोर हो गया।  


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