(सच्चा सागर) खसरा 1337/1807 मामले में मालपुरा तहसील कार्यालय की मनमानी चरम पर! आखिर राजहित में मौन क्यों ?


मालपुरा । उपखण्ड के ग्राम बृजलालनगर स्थित खसरा नं. 1337/1807 की भूमि को लेकर विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। हिंदू समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित शिकायती पत्र में साफ आरोप लगाया है कि स्पष्ट अनियमितताओं और न्यायालयीन आदेशों के बावजूद तहसील प्रशासन कार्रवाई करने से बच रहा है। सवाल सीधा है—जब रिकॉर्ड, गिरदावरी और न्यायालय के आदेश मौजूद हैं, तो फिर धारा 175 में कार्यवाही क्यों नहीं? शिकायत के अनुसार अनुसूचित जाति के नाम दर्ज खातेदारी भूमि का पंजीयन सामान्य श्रेणी की पंजीकृत संस्था मेघवंशी विकास समिति के नाम स्वीकार किया गया। वर्ष 1975 में कथित रूप से बिना विधिवत आवेदन के अलॉटमेंट हुआ, जबकि मौके पर पहले से हिंदू समाज का श्मशान विद्यमान था। सुपुर्दगीनामा में कब्जा नहीं दिया गया और मौके पर रकबा नहीं होने का अंकन भी तत्कालीन पटवारी द्वारा किया गया था। इसके बावजूद खातेदारी दर्ज होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बताया जा रहा है। वर्ष 2000 में विक्रय पत्र पंजीयन के समय भी कब्जा नहीं होने का उल्लेख था, फिर भी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। वर्तमान में सिविल न्यायालय एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर टोंक में वाद विचाराधीन है और यथास्थिति के आदेश प्रभावी हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में पुन: नन्दकिशोर मेघवंशी के नाम विक्रय पत्र पंजीयन कर नामांतरण स्वीकार किया जाना कई सवाल खड़े करता है। समाजजनों ने इसे राजस्व नियमों और न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी करार दिया है। हिंदू समाज ने मांग की है कि खसरा नं. 1337/1807 की भूमि पर धारा 175 में तत्काल कार्यवाही प्रस्तावित की जाए तथा राजहित प्रभावित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कानून के अनुसार कदम उठाता है या फिर विवाद और गहराता है।   
  


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