चरागाह बना डंपिंग यार्ड, 30 बीघा में फैला कचरा कॉलेज, छात्रावास और कॉलोनियों के बीच बदबू से लोग परेशान, डंपिंग यार्ड हटाने की मांग तेज

बौंली ( सच्चा सागर) बौंली कस्बे में नगर पालिका की ओर से चरागाह भूमि पर खुले में कचरा डाले जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जस्टाना-निवाई हाईवे स्थित करीब 30 बीघा चरागाह भूमि पर नगर पालिका रोजाना पांच हजार घरों और 10 कॉलोनियों से निकलने वाला लगभग आठ टन कचरा डलवा रही है। डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे आसपास के सरकारी संस्थानों, छात्रावासों और आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर पालिका यहां केवल घरेलू कचरा ही नहीं, बल्कि अस्पताल का दूषित कचरा और आवारा व बेसहारा मृत पशुओं को भी खुले में डाल रही है। कई स्थानों पर कचरे के ढेरों में आग लगने से जहरीला धुआं निकलता है, जिससे पूरे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषित हो रहा है। दुर्गंध और धुएं के कारण लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है, जबकि तेज हवा के दौरान पॉलीथिन और अन्य कचरा आसपास की कॉलोनियों तक पहुंच जाता है। कचरे के ढेरों के आसपास राजकीय महाविद्यालय, निर्माणाधीन आईटीआई, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), वन विभाग की पौधशाला एवं रेंज कार्यालय, बालिका छात्रावास तथा आवासीय कॉलोनियां स्थित हैं। छात्राओं, कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है और मच्छर-मक्खियों के बढ़ते प्रकोप से संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय निवासी जीएस गुर्जर ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि खुले में कचरा डालने से पॉलीथिन और गंदगी हवा के साथ घरों तक पहुंच रही है, जिससे लोगों को दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं। सीएचसी बौंली के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत मीना ने कहा कि खुले में कचरा जलाना जनस्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे निकलने वाले कार्बन कण, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक तत्व दमा, ब्रोंकाइटिस, श्वसन रोग, आंखों व त्वचा की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कचरा जलाने पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत बताई। नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ब्रजेश मीना ने स्वीकार किया कि पालिका के पास फिलहाल कचरा निस्तारण का कोई प्लांट नहीं है, इसलिए खुले में कचरा डालना मजबूरी है। इधर भाजपा मंडल बौंली अध्यक्ष हनुमत दीक्षित ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर डंपिंग यार्ड को आबादी और शैक्षणिक संस्थानों से दूर अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि मौजूदा स्थान पर वन विभाग की नर्सरी, राजकीय महाविद्यालय, आईटीआई, जनजातीय छात्रावास, अस्पताल और आवासीय कॉलोनियां होने से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द स्थायी समाधान करने की मांग की है।

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