नरेश मीणा की जेल में तबियत बिगड़ी, आईसीयू में भर्तीः समर्थक बोले- 5-6 से दिन से सीने में दर्द था, हत्या करवाना चाहती है सरकार
भगत सिंह सेना सुप्रीमो और किसान नेता नरेश मीणा की शनिवार को टोंक जेल में अचानक तबीयत बिगड़ गई। जेल में प्राथमिक जांच के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच दोपहर 12.28 बजे टोंक के सआदत अस्पताल ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने करीब पौने एक बजे उन्हें आईसीयू में भर्ती कर लिया।
सआदत अस्पताल के पीएमओ डॉ प्रतीक सालोदिया ने बताया कि नरेश मीणा की सीने में दर्द की शिकायत पर जेल प्रशासन ने अस्पताल भेजा था। यहां आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मामला गंभीर है। ईसीजी नॉर्मल आई है, ब्लड की जांच आना बाकी है। पूरी जांचें आने के बाद आगे उसी हिसाब से इलाज किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद तय करेंगे कि उनका इलाज टोंक में ही जारी रखा जाए या उन्हें जयपुर भेजा जाए।
पूर्व सरपंच आरडी गुर्जर के अनुसार, नरेश मीणा को 5-6 दिन से सीने में दर्द था, लेकिन उनका इलाज नहीं कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जेल प्रशासन के जरिए नरेश मीणा की जान को खतरे में डाल रही है और हत्या करवाना चाहती हैं, उन्हें समय पर इलाज नहीं दिया गया।
समर्थक अस्पताल पहुंचे, जेल प्रशासन पर आरोप
नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही उनके समर्थक सआदत अस्पताल पहुंचने लगे। समर्थकों ने जेल प्रशासन पर इलाज में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है।
पूर्व सरपंच आरडी गुर्जर के अनुसार, नरेश मीणा को 7-8 दिन से सीने और पीठ में दर्द था। उनका कहना है कि इसके बावजूद जेल में उनका कोई इलाज नहीं कराया गया।
आरडी गुर्जर के अनुसार, करीब सप्ताहभर पहले पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा नरेश मीणा से जेल में मिलने पहुंचे थे। उस दौरान नरेश मीणा ने बातचीत में सीने में दर्द होने की बात बताई थी। समर्थकों का आरोप है कि इसके बावजूद नरेश मीणा का इलाज नहीं कराया गया।
समर्थकों ने सरकार और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नरेश मीणा के इलाज में लापरवाही की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कर्नल किरोड़ी लाल बैंसला की बेटी सुनीता ने भी जताई चिंता
पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के बाद गत दिनो स्वर्गीय किरोड़ी लाल बैंसला की बेटी सुनीता बैंसला ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर चिंता जताई थी। उन्होंने ने कहा था कि नरेश मीणा जनता के लिय संघर्ष करता है। ऐसे लोगों के स्वास्थ पर ध्यान रखना चाहिए।
किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। वहीं टोंक जिले के छान बास सूर्या के पूर्व सरपंच आरडी गुर्जर ने बताया कि सात दिन पहले ही पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने नरेश मीणा से टोंक जेल में मिलकर मीडिया में सार्वजनिक बयान दिया था कि नरेश मीना की तबीयत ठीक नहीं है। उसे अस्पताल में भर्ती कराकर अच्छा इलाज करवाना चाहिए।
SDM को थप्पड़ मारने के मामले में गिरफ्तार हुए थे नरेश मीणा:
यह मामला 13 नवंबर को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के मतदान के दौरान शुरू हुआ था। समरावता गांव के लोगों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे।
आरोप है कि जबरन तीन लोगों से मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। अगले दिन 14 नवंबर को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। इस मामले में 60 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। नरेश मीणा को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत पर रिहा किया था।
झालावाड़ प्रदर्शन के बाद रद्द हुई जमानत:
25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की इमारत का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस ने इसे हाईकोर्ट की जमानत शर्तों के उल्लंघन का आधार बनाते हुए एससी-एसटी कोर्ट में उनकी जमानत रद्द करने की अर्जी लगाई।
कोर्ट ने 13 जुलाई को उनकी जमानत रद्द कर दी। जज आरती माहेश्वरी ने माना कि हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी थी, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने उन शर्तों का पालन नहीं किया। जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा ने 6 अगस्त को नगरफोर्ट थाने में सरेंडर किया था। फिर उसे scst कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे टोंक जेल भेज दिया था।
नरेश मीणा की जेल में तबियत बिगड़ी, आईसीयू में भर्तीः
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