लांबाहरिसिंह (सच्चा सागर)। क्षेत्र में केंद्रीय सडक़ अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) योजना एवं सेतु बंधन योजना के तहत सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा करीब 86 करोड़ रुपये की लागत से 38.5 किलोमीटर लंबी सडक़ के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य की धीमी गति और कई स्थानों पर अधूरे काम के कारण आमजन व वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीआरआईएफ योजना के तहत करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से देवल से झाइली तक 13.570 किलोमीटर लंबी एवं 7 मीटर चौड़ी सडक़ का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं लांबाहरिसिंह से नगर तक करीब 25 किलोमीटर सडक़ का निर्माण 58.59 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, जो पिछले एक वर्ष से प्रगति पर है। आरोप है कि पिछले पांच महीनों से कार्य अधूरा पड़ा होने के कारण लोगों को राहत नहीं मिल रही। बारिश शुरू होने के साथ ही लांबाहरिसिंह, नगर, थड़ी और मोरला मार्ग पर स्थिति और गंभीर हो गई है। सडक़ निर्माण के लिए डाली गई चिकनी मिट्टी के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर घायल हो रहे हैं। कई स्थानों पर सडक़ के बीच मिट्टी के ढेर, अधूरे कट एवं सडक़ किनारे निर्माण सामग्री पड़ी होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। प्रधान नाड़ ने बताया कि पिछले दो महीनों से क्षतिग्रस्त सडक़ के बीच मिट्टी के ढ़ेर लगे हुए हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान सडक़ पर फिसलन बढऩे से दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। लांबाहरिसिंह-मोरला मार्ग के आबादी क्षेत्र में करीब छह माह पहले 7 मीटर चौड़ी सीसी सडक़ तो बना दी गई, लेकिन दोनों ओर नालों का निर्माण अब तक नहीं होने से गड्ढों में पानी भर रहा है। इससे जहरीले सांप एवं अन्य जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है। कई बार चौपहिया वाहन भी गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। निर्माण कार्य अधूरा होने से दिनभर धूल-मिट्टी उड़ती रहती है। वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान छोटे-छोटे पत्थर उछलने से राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। इस संबंध में सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियर लोकेश मीणा ने बताया कि अधूरे निर्माण कार्य को लेकर ठेकेदार को तत्काल निर्देश दिए जाएंगे तथा मार्ग को सुगम बनाया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
लांबाहरिसिंह (सच्चा सागर)। क्षेत्र में केंद्रीय सडक़ अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) योजना एवं सेतु बंधन योजना के तहत सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा करीब 86 करोड़ रुपये की लागत से 38.5 किलोमीटर लंबी सडक़ के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य की धीमी गति और कई स्थानों पर अधूरे काम के कारण आमजन व वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीआरआईएफ योजना के तहत करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से देवल से झाइली तक 13.570 किलोमीटर लंबी एवं 7 मीटर चौड़ी सडक़ का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से जारी है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं लांबाहरिसिंह से नगर तक करीब 25 किलोमीटर सडक़ का निर्माण 58.59 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, जो पिछले एक वर्ष से प्रगति पर है। आरोप है कि पिछले पांच महीनों से कार्य अधूरा पड़ा होने के कारण लोगों को राहत नहीं मिल रही। बारिश शुरू होने के साथ ही लांबाहरिसिंह, नगर, थड़ी और मोरला मार्ग पर स्थिति और गंभीर हो गई है। सडक़ निर्माण के लिए डाली गई चिकनी मिट्टी के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर घायल हो रहे हैं। कई स्थानों पर सडक़ के बीच मिट्टी के ढेर, अधूरे कट एवं सडक़ किनारे निर्माण सामग्री पड़ी होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। प्रधान नाड़ ने बताया कि पिछले दो महीनों से क्षतिग्रस्त सडक़ के बीच मिट्टी के ढ़ेर लगे हुए हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान सडक़ पर फिसलन बढऩे से दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है। लांबाहरिसिंह-मोरला मार्ग के आबादी क्षेत्र में करीब छह माह पहले 7 मीटर चौड़ी सीसी सडक़ तो बना दी गई, लेकिन दोनों ओर नालों का निर्माण अब तक नहीं होने से गड्ढों में पानी भर रहा है। इससे जहरीले सांप एवं अन्य जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है। कई बार चौपहिया वाहन भी गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। निर्माण कार्य अधूरा होने से दिनभर धूल-मिट्टी उड़ती रहती है। वाहनों की क्रॉसिंग के दौरान छोटे-छोटे पत्थर उछलने से राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। इस संबंध में सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियर लोकेश मीणा ने बताया कि अधूरे निर्माण कार्य को लेकर ठेकेदार को तत्काल निर्देश दिए जाएंगे तथा मार्ग को सुगम बनाया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
