आपदा प्रबंधन के कार्यों की खुल रही पोल
मालपुरा (सच्चा सागर)। आपदा प्रबंधन के नाम पर सरकारी धन की खुली लूट का एक और चेहरा मालपुरा उपखंड के विद्यालय में सामने आया है। हालात इतने बदतर हैं कि जिन छतों को बच्चों की सुरक्षा का कवच बनना था, वे पहली ही तेज हवा में ताश के पत्तों की तरह बिखर रही हैं। बीते गुरुवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पिननी में मरम्मत कार्य की सच्चाई सामने आई, जहां तेज हवा का एक झोंका ही डामर सीट को जमीन पर ला पटका। लेकिन यह कोई एकल घटना नहीं थी, शनिवार को फिर बैरवा ढ़ाणी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय अजमेरी में वही कहानी दोहराई गई। छत पर लगाई गई डामर शीट तेज अंधड़ में उखडक़र सीधे मैदान में आ गिरी, मानो खुद चीख-चीखकर भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हो। सवाल सीधा है—क्या 2 लाख रुपए की राशि सिर्फ कागजों में ही खर्च हुई? सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से दी गई यह रकम जमीनी हकीकत में ‘मरम्मत’ कम और ‘मजाक’ ज्यादा साबित हो रही है। घटिया सामग्री, लापरवाह ठेकेदार और मौन बैठे जिम्मेदार अधिकारी—तीनों मिलकर शिक्षा के मंदिरों को खंडहर में बदलने पर तुले हैं। यदि एक तेज हवा ही इन निर्माण कार्यों की असलियत उजागर कर रही है, तो सोचिए बच्चों की सुरक्षा का क्या हाल होगा? यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे बच्चों की जान से खिलवाड़ है। अब भी यदि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लेना चाहिए कि ‘आपदा प्रबंधन’ केवल भ्रष्टाचार का नया नाम बन चुका है।
