मालपुरा (सच्चा सागर)। केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ के अंतर्गत गुरुवार को मालपुरा तहसील के दड़ावट गांव में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान खेती एवं पशुपालन में वैज्ञानिक पद्धतियों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, गुणवत्तायुक्त बीज की उपयुक्त मात्रा, फसल के अनुसार सिंचाई प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु देशी खाद और हरी खाद के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। हरी खाद के रूप में ढैंचा, ग्वार, लोबिया, मूंग जैसी दलहनी फसलों को बुवाई के 25-30 दिन बाद खेत में जोतकर मिलाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के बारे में भी बताया गया। डॉ. रंगलाल मीना ने समेकित पोषण एवं कीट प्रबंधन के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा फसलों में रोगों की रोकथाम के उपायों पर चर्चा की। सीताराम मीना ने हरी खाद के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की विधियों की जानकारी दी। पशु स्वास्थ्य शिविर में कुल 390 पशुओं (150 भेड़, 213 बकरी, 12 गाय एवं 15 भैंस) का उपचार पशु चिकित्सक डॉ. सृष्टि सोनी द्वारा किया गया तथा नि:शुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में दड़ावट गांव के 74 किसानों (68 पुरुष एवं 6 महिलाएं) ने भाग लिया। इसी क्रम में मालपुरा तहसील के काड़ीला गांव में 22 अप्रैल को सायंकाल रात्रि चौपाल एवं किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। इसमें टीम लीडर डॉ. रणधीर सिंह भट्ट, डॉ. सुभाष कच्छावा, डॉ. अजीत सिंह महला एवं डॉ. नृपेंद्र प्रताप सिंह ने सहभागिता की। कार्यक्रम में 80 किसानों (50 महिलाएं एवं 30 पुरुष) ने भाग लेकर ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित प्रश्नोत्तरी में विजेता किसानों को टीम लीडर डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की जानकारी अविकानगर के मीडिया प्रभारी डॉ. अमर सिंह मीना द्वारा दी गई।
मालपुरा (सच्चा सागर)। केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ के अंतर्गत गुरुवार को मालपुरा तहसील के दड़ावट गांव में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान खेती एवं पशुपालन में वैज्ञानिक पद्धतियों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, गुणवत्तायुक्त बीज की उपयुक्त मात्रा, फसल के अनुसार सिंचाई प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु देशी खाद और हरी खाद के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। हरी खाद के रूप में ढैंचा, ग्वार, लोबिया, मूंग जैसी दलहनी फसलों को बुवाई के 25-30 दिन बाद खेत में जोतकर मिलाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की वृद्धि के बारे में भी बताया गया। डॉ. रंगलाल मीना ने समेकित पोषण एवं कीट प्रबंधन के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा फसलों में रोगों की रोकथाम के उपायों पर चर्चा की। सीताराम मीना ने हरी खाद के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की विधियों की जानकारी दी। पशु स्वास्थ्य शिविर में कुल 390 पशुओं (150 भेड़, 213 बकरी, 12 गाय एवं 15 भैंस) का उपचार पशु चिकित्सक डॉ. सृष्टि सोनी द्वारा किया गया तथा नि:शुल्क दवाइयों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में दड़ावट गांव के 74 किसानों (68 पुरुष एवं 6 महिलाएं) ने भाग लिया। इसी क्रम में मालपुरा तहसील के काड़ीला गांव में 22 अप्रैल को सायंकाल रात्रि चौपाल एवं किसान-वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया। इसमें टीम लीडर डॉ. रणधीर सिंह भट्ट, डॉ. सुभाष कच्छावा, डॉ. अजीत सिंह महला एवं डॉ. नृपेंद्र प्रताप सिंह ने सहभागिता की। कार्यक्रम में 80 किसानों (50 महिलाएं एवं 30 पुरुष) ने भाग लेकर ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित प्रश्नोत्तरी में विजेता किसानों को टीम लीडर डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की जानकारी अविकानगर के मीडिया प्रभारी डॉ. अमर सिंह मीना द्वारा दी गई।
