बावड़ी (सच्चा सागर)। क्षेत्र में इन दिनों कैर के पेड़ों पर भरपूर फल-फूल आ रहे हैं। गांव के आस-पास जंगलों में लाल-पीले फूलों एवं फलों से लदे कैर के पेड़ आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार कैर के फल बैर के आकार के हरे रंग के होते हैं, जो वर्ष में दो बार आते हैं। इन फलों का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी एवं आचार बनाने में किया जाता है। माना जाता है कि कैर का फल जितना छोटा होता है, उससे बनने वाली सब्जी और आचार उतने ही अधिक स्वादिष्ट बनते हैं। कैर के लाल रंग के पके हुए फल खाने के काम आते हैं, जबकि हरे फलों को सुखाकर कढ़ी बनाने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा सूखे फलों को पीसकर चूर्ण तैयार किया जाता है, जिसमें थोड़ा नमक मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द एवं कब्ज में लाभ मिलता है। स्थानीय सब्जी दुकानों पर कैर लगभग 600 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जिससे ग्रामीणों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।
बावड़ी (सच्चा सागर)। क्षेत्र में इन दिनों कैर के पेड़ों पर भरपूर फल-फूल आ रहे हैं। गांव के आस-पास जंगलों में लाल-पीले फूलों एवं फलों से लदे कैर के पेड़ आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जानकारी के अनुसार कैर के फल बैर के आकार के हरे रंग के होते हैं, जो वर्ष में दो बार आते हैं। इन फलों का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी एवं आचार बनाने में किया जाता है। माना जाता है कि कैर का फल जितना छोटा होता है, उससे बनने वाली सब्जी और आचार उतने ही अधिक स्वादिष्ट बनते हैं। कैर के लाल रंग के पके हुए फल खाने के काम आते हैं, जबकि हरे फलों को सुखाकर कढ़ी बनाने में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा सूखे फलों को पीसकर चूर्ण तैयार किया जाता है, जिसमें थोड़ा नमक मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द एवं कब्ज में लाभ मिलता है। स्थानीय सब्जी दुकानों पर कैर लगभग 600 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जिससे ग्रामीणों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।
