जनता का हाल बेहाल
लांबाहरिसिंह (सच्चा सागर)। सरकार के बड़े-बड़े दावे और बजट में करोड़ों की घोषणाएं जमीन पर किस तरह दम तोड़ रही हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण चतरपुरा गांव के पास बन रही एमडीआर-308 देवल रोड है। 1.2 करोड़ रुपए की लागत और 2.60 किलोमीटर लंबाई वाली यह सडक़ आज भी अधूरी पड़ी है, जबकि निर्माण अवधि खत्म हुए छह माह से अधिक समय बीत चुका है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा 4 दिसंबर 2024 को शुरू किए गए इस सडक़ निर्माण कार्य को 3 जून 2025 तक पूरा होना था, लेकिन हालात यह हैं कि आज तक डामरीकरण का काम भी पूरा नहीं हो सका है। सडक़ अधूरी होने से राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने ठेकेदार को 10 प्रतिशत पेनल्टी का नोटिस तो थमा दिया, लेकिन असली समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। ठेकेदार का साफ कहना है कि अब तक किए गए कार्य का पूरा भुगतान नहीं मिला, जिसके चलते आगे का काम ठप पड़ा है। यानी एक तरफ सरकार और विभाग भुगतान अटका रहे हैं, तो दूसरी तरफ जनता अधूरी सडक़ की मार झेल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी इस मामले में पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। छह महीने से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी न तो काम पूरा हुआ और न ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हुई। उधर ठेकेदार भी भुगतान के लिए विभाग के चक्कर काटने को मजबूर है। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता लोकेश मीणा ने बताया कि नियमों के अनुसार समय पर कार्य पूरा नहीं करने पर ठेकेदार पर 10 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जा रही है और जल्द ही डामरीकरण का कार्य पूरा कराने के लिए बातचीत जारी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है। जब भुगतान ही नहीं होगा तो काम कैसे पूरा होगा? और कब तक जनता अधूरी सडक़ों पर धूल और कीचड़ झेलती रहेगी ?
