रानोली (सच्चा सागर)। कस्बे में इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। जगह-जगह नालियों में गंदा पानी भरा हुआ है और आम रास्तों पर जलभराव होने से ग्रामीणों व छात्र-छात्राओं को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रशासन की उदासीनता के चलते सफाई व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। कई मोहल्लों में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं होने के कारण कचरा जमा हो गया है और गंदगी फैल रही है। बताया जा रहा है कि मानसून नजदीक होने के बावजूद सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में जलभराव की समस्या और विकराल रूप ले सकती है। गंदगी से उठ रही दुर्गंध और बढ़ते मच्छरों के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सफाई के लिए पंचायत को लाखों रुपए का बजट मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आता और सफाई केवल कागजों में ही सीमित है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जब किसी अधिकारी के आने की सूचना मिलती है, तब केवल मुख्य बस स्टैंड के आसपास ही सफाई की जाती है और कचरे को वहीं जला दिया जाता है। इससे उठने वाले जहरीले धुएं से आसपास के दुकानदारों को सांस लेने में परेशानी होती है, जबकि नियमानुसार कचरे का निस्तारण कस्बे से दूर डंपिंग यार्ड में किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
रानोली (सच्चा सागर)। कस्बे में इन दिनों स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। जगह-जगह नालियों में गंदा पानी भरा हुआ है और आम रास्तों पर जलभराव होने से ग्रामीणों व छात्र-छात्राओं को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रशासन की उदासीनता के चलते सफाई व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। कई मोहल्लों में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं होने के कारण कचरा जमा हो गया है और गंदगी फैल रही है। बताया जा रहा है कि मानसून नजदीक होने के बावजूद सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में जलभराव की समस्या और विकराल रूप ले सकती है। गंदगी से उठ रही दुर्गंध और बढ़ते मच्छरों के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सफाई के लिए पंचायत को लाखों रुपए का बजट मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आता और सफाई केवल कागजों में ही सीमित है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जब किसी अधिकारी के आने की सूचना मिलती है, तब केवल मुख्य बस स्टैंड के आसपास ही सफाई की जाती है और कचरे को वहीं जला दिया जाता है। इससे उठने वाले जहरीले धुएं से आसपास के दुकानदारों को सांस लेने में परेशानी होती है, जबकि नियमानुसार कचरे का निस्तारण कस्बे से दूर डंपिंग यार्ड में किया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
