टोंक के नवाचार ‘पढ़ाई विथ एआई’ को मिला देशव्यापी विस्तार के संकेत नीति आयोग के मंच से हुई सराहना, पूरे देश में लागू करने की तैयारी

टोंक (सच्चा सागर)। जिले के लिए गर्व का विषय बनते हुए शिक्षा के क्षेत्र में किया गया अभिनव प्रयोग ‘पढ़ाई विथ एआई’ अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। भारत सरकार के नीति आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम फ्रंटियर 50 में इस नवाचार को देशभर के सामने प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में टोंक जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने ‘पढ़ाई विथ एआई’ नवाचार का प्रभावी प्रेजेंटेशन नीति आयोग एवं देशभर से आए 50 जिलों के कलेक्टर्स के समक्ष दिया। इस प्रस्तुति ने न केवल शिक्षा में तकनीक के उपयोग की नई दिशा दिखाई, बल्कि ग्रामीण व सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए द्वार भी खोले।

केंद्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों ने की खुलकर प्रशंसा

इस नवाचार की सराहना भारत सरकार के आईटी सचिव अभिषेक सिंह एवं नीति आयोग के अवर सचिव रोहित कुमार ने की। नीति आयोग के अवर सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि टोंक जिले द्वारा किया गया यह नवाचार शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल प्रोजेक्ट है, जिसे जल्द ही देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शीघ्र ही जिला कलेक्टर्स का एक विशेष दल टोंक जिले का दौरा करेगा, जहां वे ‘पढ़ाई विथ एआई’ की कार्यप्रणाली, परिणाम और प्रभाव का प्रत्यक्ष अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

 ‘पढ़ाई विथ एआई’ टीम ने बढ़ाया टोंक का मान

कार्यक्रम में ‘पढ़ाई विथ एआई’ की टीम से प्रधानाचार्या सुशीला करनाणी, फरहान खान एवं महेंद्र कुमार सैनी ने भी सहभागिता निभाई। टीम सदस्यों ने एआई आधारित शिक्षण प्रणाली, छात्रों की सीखने की गति में सुधार, व्यक्तिगत लर्निंग मॉडल और शिक्षकों के लिए तकनीकी सहयोग जैसे पहलुओं की जानकारी दी।

शिक्षा के क्षेत्र में टोंक बना रोल मॉडल

‘पढ़ाई विथ एआई’ नवाचार के माध्यम से टोंक जिला यह साबित कर चुका है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के बल पर शिक्षा में बड़ा परिवर्तन संभव है। देशभर में इस मॉडल के लागू होने से न केवल विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा का लाभ मिलेगा, बल्कि डिजिटल इंडिया और नई शिक्षा नीति के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी। टोंक जिले का यह नवाचार अब राष्ट्रीय पहचान की ओर अग्रसर है, जो आने वाले समय में देश की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव का आधार बन सकता है।


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