(सच्चा सागर )नर्सिंग भर्ती: 1965 के सेवा नियमों और पूर्व के अनुभवों का सम्मान करे सरकार, ट्विटर पर उमड़ा संविदा/निविदा नर्सिंग कार्मिको का जनसैलाब सीएम भजनलाल शर्मा की कैबिनेट मीटिंग से पहले चलाया ट्विटर अभियान


 


नर्सिंग भर्ती: 1965 के सेवा नियमों और पूर्व के अनुभवों का सम्मान करे सरकार, ट्विटर पर उमड़ा संविदा/निविदा नर्सिंग कार्मिको का जनसैलाब

सीएम भजनलाल शर्मा की कैबिनेट मीटिंग से पहले चलाया ट्विटर अभियान 



जयपुर | सच्चा सागर

राजस्थान की आगामी नर्सिंग भर्ती को लेकर छिड़े ट्विटर डिजिटल अभियान में आज एक नया मोड़ आया है। प्रदेशभर के नर्सिंग अभ्यर्थियों ने राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 का हवाला देते हुए सरकार से 'मेरिट प्लस बोनस' आधारित भर्ती की पुरजोर मांग की है। राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप चौधरी (@PRADEEP_RNOU) ने बताया कि आज ट्विटर पर #आगामी_नर्सिंग_भर्ती_मैरिट_बोनस अभियान के तहत संविदा/निविदा कार्मिको ने मुख्यमंत्री के नाम अपनी भावनाओं को साझा किया।

⚖️ 1965 के सेवा नियमों का हवाला

यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि, "राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 में समय-समय पर किए गए संशोधनों ने हमेशा अनुभव और योग्यता के संतुलन को प्राथमिकता दी है। पूर्व की सरकारों ने भी इसी नियमावली के तहत मेरिट के आधार पर भर्तियाँ कर अनुभवी स्वास्थ्य कर्मियों को व्यवस्था का हिस्सा बनाया है। नर्सेज़ नेता मनोज जोशी ने कहा कि हम माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करते हैं कि इसी ऐतिहासिक नियमावली की भावना का सम्मान करते हुए आगामी भर्ती का विज्ञापन जारी करें।"

📜 2013 से 2023 तक की सफल परंपरा

न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से युवाओं ने सरकार को याद दिलाया कि कैसे वर्ष 2013, 2018 और 2023 की भर्तियों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है:

• पारदर्शिता: मेरिट आधारित चयन से बिना किसी विवाद के हजारों नियुक्तियां हुईं।

• अनुभव का लाभ: 1965 के नियमों के अंतर्गत बोनस अंकों (10, 20, 30) के प्रावधान ने उन कर्मियों को स्थायी होने का हक दिया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में सेवाएँ दीं।

• कोविड वॉरियर्स: वर्तमान में कार्यरत हजारों संविदा कर्मी इसी नियम के तहत अपने भविष्य को सुरक्षित देख रहे हैं।

🌟 मुख्यमंत्री जी से 'न्याय' की आस

प्रदीप चौधरी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा, "हमें अपनी सरकार पर पूरा भरोसा है। हमारा उद्देश्य केवल यह है कि 1965 के सेवा नियमों की निरंतरता बनी रहे और अनुभवी नर्सिंग ऑफिसर को उनका वाजिब हक मिले।"

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