निवाई (सच्चा सागर)। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी संघ के सानिध्य में सोमवार को बंपुई वालों के चेत्यालय में जिन सहस्त्र नाम मण्डल विधान आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रात: कालीन देव वंदना व सहस्त्रनाम की भक्ति के रसास्वादन एवं जिन सहस्त्र नाम का समवशरण सजाया जाएगा। जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा व विमल जौंला ने बताया कि 13 जूलाई को सुबह बंपुई वालों की धर्मशाला में स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर जी में जिन सहस्त्र नाम मण्डल विधान आयोजित किया जाएगा, जिसमें भगवान के 1008 नामों की आराधना भक्ति संगीत के साथ की जाएगी। जौंला ने बताया कि मुनि विलोक सागर महाराज संध का सोमवार को सुबह निवाई में मंगल प्रवेश होगा। आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने ग्रीष्मकालीन प्रवास के दौरान प्रवचन प्रवचन देते हुए कहा कि भक्ति रूपी सोपान ही मुक्ति रूपी मंजिल तक पहुँचाती है। गुरु भक्ति से अज्ञानी भी ज्ञानी बन जाता है, पामर भी परमात्मा बन जाता है। जैसे पानी की बूंद का कोई मूल्य नहीं लेकिन सीप शरण में वह मोती बनते हुए अनमोल हो जाती है। वैसे ही संसार में पतित जीव गुरु शरण स्वीकारता है। गुरु के अनंत उपकार उसके जीवन को उसकी आत्मा को मोती सा अनमोल बना देते हैं।
निवाई (सच्चा सागर)। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी संघ के सानिध्य में सोमवार को बंपुई वालों के चेत्यालय में जिन सहस्त्र नाम मण्डल विधान आयोजित किया जाएगा। जिसमें प्रात: कालीन देव वंदना व सहस्त्रनाम की भक्ति के रसास्वादन एवं जिन सहस्त्र नाम का समवशरण सजाया जाएगा। जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा व विमल जौंला ने बताया कि 13 जूलाई को सुबह बंपुई वालों की धर्मशाला में स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर जी में जिन सहस्त्र नाम मण्डल विधान आयोजित किया जाएगा, जिसमें भगवान के 1008 नामों की आराधना भक्ति संगीत के साथ की जाएगी। जौंला ने बताया कि मुनि विलोक सागर महाराज संध का सोमवार को सुबह निवाई में मंगल प्रवेश होगा। आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने ग्रीष्मकालीन प्रवास के दौरान प्रवचन प्रवचन देते हुए कहा कि भक्ति रूपी सोपान ही मुक्ति रूपी मंजिल तक पहुँचाती है। गुरु भक्ति से अज्ञानी भी ज्ञानी बन जाता है, पामर भी परमात्मा बन जाता है। जैसे पानी की बूंद का कोई मूल्य नहीं लेकिन सीप शरण में वह मोती बनते हुए अनमोल हो जाती है। वैसे ही संसार में पतित जीव गुरु शरण स्वीकारता है। गुरु के अनंत उपकार उसके जीवन को उसकी आत्मा को मोती सा अनमोल बना देते हैं।
