गरीबों के नाम पर करोड़ों की जमीन का खेल, भूमाफिया बेखौफ


एनएफएसए लाभार्थियों के नाम से कृषि भूमि की रजिस्ट्री कर अवैध कॉलोनियां काटने का आरोप

 उच्च स्तरीय जांच की मांग

टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे में भूमाफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे अब राज्य सरकार की योजनाओं और कानून व्यवस्था को खुलेआम ठेंगा दिखा रहे हैं। गरीब, भोले-भाले और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों को ढाल बनाकर करोड़ों रुपए की जमीनों की अवैध खरीद-फरोख्त का धंधा बेखौफ चल रहा है।    

एससी/एसटी की जमीन पर माफिया की नजर 

सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र के आसपास स्टेट हाईवे-37, ग्राम बस्सी और केकड़ी रोड पर स्थित अनुसूचित जाति-जनजाति की कीमती कृषि भूमि को भूमाफिया मुँह-मांगे दामों पर खरीद रहे हैं। इसके बाद एनएफएसए यानी खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वित गरीब अनुसूचित जाति के लोगों के नाम पर पंजीयन कराकर, बिना भू-रूपांतरण किए सीधे प्लाट काटे जा रहे हैं तहसील कार्यालय के पास व पुलिस थाने के पीछे खसरा नंबर 3407, अभय कुमार पुत्र नंद लाल, जाति कोली के नाम गत एक माह में दर्जनों प्लाटो का पंजीयन करवाया जा चुका जबकि उक्त व्यक्ति  गरीबी की रेखा में आता है खाद्य सुरक्षा का लाभ भी उठा रहा है वो अचानक केसे करोड़ पति बन गया प्रति दिन लाखो रुपए की भूमि का पंजीयन करवा रहा है 

गरीब बने मोहरा, माफिया रहे सुरक्षित

पूरा खेल बेहद शातिराना तरीके से रचा गया है। कानूनन स्वर्ण जाति के नाम कृषि भूमि की रजिस्ट्री संभव न होने पर भूमाफियाओं ने स्ष्ट/स्ञ्ज के गरीब, एनएफएसए लाभान्वित व्यक्तियों के नाम रजिस्ट्री का रास्ता निकाला। प्लाटों की मोटी रकम भूमाफिया सीधे नकद या अपने खातों में लेते हैं, जबकि रजिस्ट्री गरीब व्यक्ति के नाम से कराई जाती है।  

इसका मकसद साफ है

यदि कभी आयकर विभाग या उपखण्ड प्रशासन कार्रवाई करे, तो भूमाफिया साफ बच निकलें और कार्रवाई का शिकार सिर्फ गरीब व्यक्ति बने। यही कारण है कि आज तक इस पूरे नेटवर्क पर आयकर विभाग और प्रशासन ने आँखें मूंद रखी हैं।      

एक दशक से अवैध कॉलोनियों की लूट

नगर पालिका क्षेत्र के आसपास बीते 10 वर्षों से अवैध कॉलोनियां काटकर सरकारी राजकोष को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। बिना नक्शा पास, बिना भू-रूपांतरण और बिना पट्टे के प्लाट बेचे जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग नगर पालिका, राजस्व, आरबीआई और आयकर ने आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।   

गरीबी रेखा पर सवालिया निशान

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो लोग गरीबी रेखा के नीचे दर्ज हैं और मुफ्त गेहूं ले रहे हैं, वे कैसे लाखों-करोड़ों की जमीन खरीदकर कॉलोनियां काट रहे हैं और रोजाना लाखों रुपए के प्लाटों का पंजीयन करा रहे हैं? एनएफएसए का राशन लेने वाला व्यक्ति अचानक जमीन का मालिक कैसे बन गया? इसके बावजूद न तो प्रशासन ने जांच की, न आयकर विभाग ने कभी जहमत उठाई।   

कब टूटेगा गठजोड़?

यह पूरा मामला साफ तौर पर संगठित भूमाफिया नेटवर्क और प्रशासनिक चुप्पी की ओर इशारा करता है। गरीब के नाम जमीन, माफिया की जेब में पैसा और जिम्मेदारों की चुप्पी यही टोड़ारायसिंह का मौजूदा सच है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जिला कलेक्टर और एसपी स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। दोषी भूमाफियाओं, दलालों और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे और गरीब को ढ़ाल बनाकर काले कारनामे करने वालों पर कब गाज गिरेगी।    


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