मजदूर दिवस पर बस्ती में पहुंचा न्याय तंत्र : गाडिय़ा लौहारों ने गिनाईं परेशानियां


अधिकारियों ने दिया समाधान का भरोसा 

- रमाकांत शर्मा

फागी (सच्चा सागर)। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर फागी कस्बे की गाडिय़ा लौहार बस्ती में न्याय व्यवस्था खुद लोगों के बीच पहुंची। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर ने ‘न्याय सबके लिए’ अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया, जहां श्रमिकों और वंचित वर्ग को उनके अधिकारों की जानकारी दी गई। शिविर की अध्यक्षता अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश कीर्ति सिंहमार ने की। उनके साथ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेखा तिवारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति रखावत भी मौजूद रहीं। न्यायाधीशों ने कहा कि हर श्रमिक को सम्मानजनक जीवन, समानता, 8 घंटे का कार्यदिवस, न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल मिलना उसका अधिकार है।        

समस्याओं का अंबार, बुनियादी सुविधाओं को तरसी बस्ती

शिविर में गाडिय़ा लौहार बस्ती के लोगों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। लोगों ने बताया कि आज भी वे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। प्रमुख मांगों में आवास के लिए भूमि आवंटन, सामुदायिक भवन, शौचालय और पक्की नालियों का निर्माण, वृद्ध व विधवा पेंशन का लाभ, पेयजल की समुचित व्यवस्था, राशन कार्ड बनवाना, आंगनबाड़ी केंद्र खोलना, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाना, न्यायपालिका के पहुंचने से जगी उम्मीद, बस्ती में पहली बार न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों के पहुंचने पर लोगों ने खुशी जताई।    

अधिकारियों ने दिया आश्वासन

अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश कीर्ति सिंहमार ने समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से समन्वय कर शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा, ‘मजदूर दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों की याद दिलाने का अवसर है।’

जागरूकता के साथ चेतावनी

पैरालीगल वॉलिंटियर्स रामनारायण सैनी, राजेंद्र टेलर, मुकेश शर्मा और तेजपाल मौर्य ने साइबर अपराध, नशे की लत, मोबाइल के दुष्प्रभाव और बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करना कानूनन अपराध है, जिसमें सजा और जुर्माने का प्रावधान है।        

काम की जानकारी : ये नंबर रखें याद

1930-साइबर अपराध हेल्पलाइन, 15100-नि:शुल्क विधिक सहायता, 1098-चाइल्ड हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपात सेवा इस शिविर के जरिए प्रशासन ने संदेश दिया कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरतमंदों तक पहुंचना भी उसकी जिम्मेदारी है और बस्तीवासियों को अब इस भरोसे के हकीकत में बदलने का इंतजार है।                     


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