टोंक (सच्चा सागर)। मुराद एकेडमी के तत्वावधान में सिविल लाइन रोड स्थित एलिक्जर क्लासेज, ताल कटोरा सर्किल पर शहर के बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहिबजादा मोहम्मद शमशीर खान शाहीन के काव्य संग्रह ‘परवाज’ के देवनागरी लिपि संस्करण का भव्य विमोचन एवं महफिले कव्वाली का शनिवार रात्रि को शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुराद एकेडमी के संरक्षक अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में फिरोज कमाल अंसारी डायरेक्टर, कमाल पब्लिकेशन, जबलपुर मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हुसैन रजा खान पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान उर्दू अकादमी, डॉ. सैयद अब्दुल महमीन कादरी डायरेक्टर, हादी दकन लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर, हैदराबाद तथा प्रो. अजीजउल्लाह शीरानी मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मुतीउल्लाह नवाब वासिफी द्वारा तिलावते कुरान से हुआ तथा हारिस वासिफी ने नआते पाक पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। इसके पश्चात मुराद एकेडमी द्वारा मुख्य अतिथि फिरोज कमाल अंसारी एवं कैप्टन शमशीर खान शाहीन का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। तत्पश्चात अतिथियों ने ‘परवाज’ पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर सैयद साजिद अली टोकी ने पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे साहित्य जगत की महत्वपूर्ण कृति बताया। प्रोफेसर हुसैन रजा खान ने शमशीर खान शाहीन के व्यक्तित्व एवं उनकी बहुमुखी प्रतिभा पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं डॉ. सैयद अब्दुल महमीन कादरी ने कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए टोंक के समृद्ध अदबी माहौल की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। संचालन कारी मुतीउल्लाह नवाब वासिफी ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में महफिले कव्वाली ने समां बांध दिया। मोहम्मद आसिफ कव्वाल एवं अमीन सआदत साबरी ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महफिल की शुरुआत शमशीर खान शाहीन द्वारा पेश नआते पाक प्रीत में तुमरी तरपत है मोरा जिया, कमली वाले सजन-कमली वाले पिया... से हुई, जिसे खूब सराहा गया। इसके साथ ही शाहीन साहब की यह रचना इस तरह याद उनकी दबी रह गई, जैसे इक फांस दिल में चुभी रह गई, मुझको जिंदगी में सब कुछ मिला मगर, जिसको चाहा बस उसी की कमी रह गई... ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त मोहम्मद आसिफ कव्वाल एंड पार्टी ने मुराद सईदी की गजल ‘किस्मत से मिल गई है जगह चश्मे यार में, है आलम-ए-निशात मेरे इख्तियार में... को भी शानदार अंदाज में पेश कर खूब वाहवाही लूटी। रात्रि 2 बजे तक चले इस कार्यक्रम में कव्वालों ने ‘छाप तिलक सब छीन ली’ और ‘केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देश’ जैसी एक से बढक़र एक रचनाएं प्रस्तुत कर माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया। कार्यक्रम में मिर्जा नसीम बैग, शाहबाज शीरानी, डॉ. सैयद बदर अहमद, डॉ. सरफराज अहमद, डॉ. सआदत रईस, डॉ. मोहम्मद बाकिर, जफर रजा खान, रियाज राना, मुनीर अहमद नकवी, सैयद अयान अली, शहाबुद्दीन खान, मोहम्मद आतिफ, आरिफ मेहमूद, सैयद जीशान हैदर, मुजाहिद हुसैन, मोहम्मद इरशाद, सैयद शाहिद शाह, सैयद जहीर हसन, अहसन मदनी, नासेह मदनी, मीर शेर खान, शीरीन खान, निदा खान सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर कैप्टन शमशीर खान शाहीन की पत्नी शीरीन खान ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
टोंक (सच्चा सागर)। मुराद एकेडमी के तत्वावधान में सिविल लाइन रोड स्थित एलिक्जर क्लासेज, ताल कटोरा सर्किल पर शहर के बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहिबजादा मोहम्मद शमशीर खान शाहीन के काव्य संग्रह ‘परवाज’ के देवनागरी लिपि संस्करण का भव्य विमोचन एवं महफिले कव्वाली का शनिवार रात्रि को शानदार आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के साहित्य प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुराद एकेडमी के संरक्षक अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में फिरोज कमाल अंसारी डायरेक्टर, कमाल पब्लिकेशन, जबलपुर मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रोफेसर हुसैन रजा खान पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान उर्दू अकादमी, डॉ. सैयद अब्दुल महमीन कादरी डायरेक्टर, हादी दकन लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर, हैदराबाद तथा प्रो. अजीजउल्लाह शीरानी मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ कारी मुतीउल्लाह नवाब वासिफी द्वारा तिलावते कुरान से हुआ तथा हारिस वासिफी ने नआते पाक पेश कर माहौल को रूहानी बना दिया। इसके पश्चात मुराद एकेडमी द्वारा मुख्य अतिथि फिरोज कमाल अंसारी एवं कैप्टन शमशीर खान शाहीन का माल्यार्पण एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। तत्पश्चात अतिथियों ने ‘परवाज’ पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर सैयद साजिद अली टोकी ने पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे साहित्य जगत की महत्वपूर्ण कृति बताया। प्रोफेसर हुसैन रजा खान ने शमशीर खान शाहीन के व्यक्तित्व एवं उनकी बहुमुखी प्रतिभा पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं डॉ. सैयद अब्दुल महमीन कादरी ने कार्यक्रम में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए टोंक के समृद्ध अदबी माहौल की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अब्दुल हफीज शौक अहसनी ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। संचालन कारी मुतीउल्लाह नवाब वासिफी ने किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में महफिले कव्वाली ने समां बांध दिया। मोहम्मद आसिफ कव्वाल एवं अमीन सआदत साबरी ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। महफिल की शुरुआत शमशीर खान शाहीन द्वारा पेश नआते पाक प्रीत में तुमरी तरपत है मोरा जिया, कमली वाले सजन-कमली वाले पिया... से हुई, जिसे खूब सराहा गया। इसके साथ ही शाहीन साहब की यह रचना इस तरह याद उनकी दबी रह गई, जैसे इक फांस दिल में चुभी रह गई, मुझको जिंदगी में सब कुछ मिला मगर, जिसको चाहा बस उसी की कमी रह गई... ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अतिरिक्त मोहम्मद आसिफ कव्वाल एंड पार्टी ने मुराद सईदी की गजल ‘किस्मत से मिल गई है जगह चश्मे यार में, है आलम-ए-निशात मेरे इख्तियार में... को भी शानदार अंदाज में पेश कर खूब वाहवाही लूटी। रात्रि 2 बजे तक चले इस कार्यक्रम में कव्वालों ने ‘छाप तिलक सब छीन ली’ और ‘केसरिया बालम आओ नी, पधारो म्हारे देश’ जैसी एक से बढक़र एक रचनाएं प्रस्तुत कर माहौल को पूरी तरह रंगीन बना दिया। कार्यक्रम में मिर्जा नसीम बैग, शाहबाज शीरानी, डॉ. सैयद बदर अहमद, डॉ. सरफराज अहमद, डॉ. सआदत रईस, डॉ. मोहम्मद बाकिर, जफर रजा खान, रियाज राना, मुनीर अहमद नकवी, सैयद अयान अली, शहाबुद्दीन खान, मोहम्मद आतिफ, आरिफ मेहमूद, सैयद जीशान हैदर, मुजाहिद हुसैन, मोहम्मद इरशाद, सैयद शाहिद शाह, सैयद जहीर हसन, अहसन मदनी, नासेह मदनी, मीर शेर खान, शीरीन खान, निदा खान सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर कैप्टन शमशीर खान शाहीन की पत्नी शीरीन खान ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
