- रामबिलास लांगड़ी
निवाई (सच्चा सागर)। पर्यावरण संरक्षण की बातें तो अक्सर मंचों और सेमिनारों में सुनने को मिल जाती हैं, लेकिन टोंक जिले के निवाई क्षेत्र में एक व्यक्ति ने इसे केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने कर्मों से ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसकी पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है। माताजी का भुरटिया (कोथून, लालसोट रोड) निवासी और लुहारा के पूर्व सरपंच मदनलाल चौधरी ने पीपल के 108 पेड़ों को लगाया, वर्षों तक उनकी देखभाल की और अब उन्हें बेटी की तरह पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह के बंधन में बांध रहे हैं। मदनलाल चौधरी ने वर्ष 2021 में पर्यावरण संरक्षण की भावना से 108 पीपल के पौधे लगाए थे। इन पौधों को विशेष रूप से हैदराबाद से मंगवाया गया था, जिस पर करीब 1.50 लाख रुपए का खर्च आया। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए चाकसू से लोहे की जालियां बनवाकर लगवाई गईं, ताकि कोई पशु या अन्य कारण से पौधों को नुकसान न पहुंचे। पिछले कुछ वर्षों में इन पौधों की देखभाल उन्होंने अपने बच्चों की तरह की और आज उनमें से 51 पीपल के पेड़ पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। अब इन्हीं 51 पीपल वृक्षों का विवाह ठाकुर जी शालीग्राम के साथ पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ कराया जा रहा है। यह विवाह किसी सामान्य कार्यक्रम की तरह नहीं बल्कि एक पारंपरिक पारिवारिक शादी की तरह आयोजित किया जा रहा है, जिसमें सभी रस्में—गणेश निमंत्रण, लग्न लेखन, तेल सांकड़ी, चाक पूजन, महिला संगीत, भात पहरावणी और पाणिग्रहण संस्कार—पूरी परंपरा के साथ संपन्न कराई जा रही हैं। 9 मार्च को मुख्य विवाह समारोह होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों ने करीब 7 से 8 हजार लोगों के लिए प्रीतिभोज की व्यवस्था की है। भोजन बनाने के लिए करीब 20 हलवाई लगाए गए हैं, जो लड्डू, पूड़ी, भुजिया, दाल, रोटी और सब्जी जैसे पारंपरिक व्यंजन तैयार कर रहे हैं। मदनलाल चौधरी का कहना है कि पेड़ ही धरती पर प्राणवायु का आधार हैं। आज जब पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है, तब हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अधिक से अधिक पेड़ लगाए और उनकी रक्षा करे। इसी संदेश को समाज तक पहुंचाने के लिए उन्होंने यह अनूठा आयोजन किया है। इस विवाह समारोह में जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और विभिन्न समाज व धर्मों के प्रतिष्ठित लोगों को आमंत्रित किया गया है। गांव और आसपास के क्षेत्रों में भी इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग पेड़ों को काटने से भी नहीं हिचकते, वहां एक व्यक्ति द्वारा पेड़ों को पुत्र की तरह पालना और बेटी की तरह उनका विवाह करना पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत उदाहरण है। निवाई में हो रहा यह अनूठा आयोजन न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन सकता है कि यदि एक व्यक्ति ठान ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। इस पहल को लोग प्रकृति के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में होने लगी है।
