टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्र में रंगों और भाईचारा का पर्व होली दहन और धुलंडी तथा बादशाह की सवारी निकलने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कस्बावासियों ने बताया कि होली दहन में भद्रा काल देखने के पश्चात दहन किया जाता है, लेकिन पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होने रंगों का त्योहार पर रंग (खुशी) खेलना अशुभ माना जाता है। होली पर 2 मार्च को भद्रा के पूछ काल में होली दहन किया जा सकता है, लेकिन पूर्णिमा के दिन 3 मार्च को चंद्र ग्रहण के लिए सूतक सुबह 6.20 बजे शुरू होगा तथा ग्रहण दोपहर बाद 3.20 बजे से शुरू हो कर 6.48 बजे तक पूर्ण होगा। ऐसे में दिन भर सूतक और ग्रहण होने से रंगों का त्योहार खेलना वर्जित माना गया है। इस संदर्भ में देखा जाए तो होली दहन के अगले दिन 3 मार्च को होली नहीं खेली जाएगी और 4 मार्च को धुलंडी और 5 मार्च को बादशाह की सवारी निकाली जाएगी। जो भी हो कस्बे के प्रकांड विद्वान और ज्योतिषाचार्य, मंदिर पुजारी सहित अन्य गणमान्य को निर्णय लेने से असमंजस की स्थिति साफ हो सकेगी।
होली दहन व धुलंडी को लेकर असमंजस, चंद्र ग्रहण के चलते संशय की स्थिति
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