बाल सुरक्षा व संरक्षण की दिशा में जिले के लिए 2025 रहा उल्लेखनीय वर्ष
12 बाल विवाह रुकवाए, 10 बच्चों को बाल श्रम से कराया मुक्त
टोंक।( सच्चा सागर) बाल सुरक्षा एवं संरक्षण की दिशा में टोंक जिला वर्ष 2025 में एक मिसाल बनकर उभरा है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं समुदाय के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सिकोईडिकोन ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु प्रभावी एवं समयबद्ध हस्तक्षेप किया। वर्ष 2025 के दौरान सिकोईडिकोन द्वारा जिले में 12 बाल विवाह रुकवाए गए। इसके साथ ही 10 बच्चों को बाल श्रम जैसी अमानवीय प्रथाओं से मुक्त कराया गया। वहीं 10 बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाकर बच्चों को पुन: विद्यालयों में दाखिला दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित दिशा मिल सकी। सिकोईडिकोन, राजस्थान में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन’ का सहयोगी संगठन है। जेआरसी के 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में सक्रिय रूप से बाल अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। जेआरसी नेटवर्क द्वारा 1 जनवरी 2025 से अब तक देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए, साथ ही 55,146 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लडक़े व 14,316 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा 42,217 बाल श्रम के मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। इन उपलब्धियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिकोईडिकोन, टोंक के परियोजना समन्वयक देवेंद्र कुमार जांगिड़ ने कहा कि बाल सुरक्षा की दिशा में 2025 टोंक जिले के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन, ग्राम पंचायतों, शिक्षकों और समुदाय के सहयोग से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव संभव हो पाया है। किसी बच्चे को बाल श्रम से मुक्त कराना केवल पहला कदम है, असली चुनौती उनके पुनर्वास, शिक्षा और परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोडऩे की है, ताकि वे दोबारा शोषण का शिकार न बनें। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क के सहयोग से सिकोईडिकोन वर्ष 2030 तक भारत से बाल विवाह और बाल श्रम के उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है। यह नेटवर्क रेलवे सुरक्षा बल सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय में काम करता है। बाल विवाह की रोकथाम में धार्मिक नेताओं की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। देशभर में तीन लाख से अधिक धार्मिक गुरुओं को इस अभियान से जोड़ा गया है।
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