सरकारी अस्पताल में इलाज ठप, प्राइवेट क्लीनिकों में 'हड्डी' के डॉक्टरों की बल्ले-बल्ले

 टोंक। जिले के सबसे बड़े राजकीय सहादत अस्पताल के हड्डी (ऑर्थोपेडिक) विभाग में इन दिनों इलाज के नाम पर मरीजों की जेब काटने का नया खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आरोप है कि अस्पताल में कार्यरत कुछ डॉक्टर अपनी जेबें भरने के लिए सरकारी सुविधाओं को दरकिनार कर बेबस और गरीब मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं।सहादत अस्पताल में सरकार की ओर से जांच, ऑपरेशन और दवाइयों की तमाम सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई गई हैं। इसके बावजूद दूर-दराज के गांवों से आने वाले असहाय मरीजों को डॉक्टर तरह-तरह के बहाने बनाकर मिसगाइड करते हैं।मरीजों को कहा जाता है कि अस्पताल में प्लेट, स्क्रू या ऑपरेशन के उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक भेजना डॉक्टर मरीजों को सीधे चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों या अपने सांठगांठ वाले क्लीनिकों में रेफर कर देते हैं।


**मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि डॉक्टर केवल मरीज रेफर करके ही शांत नहीं बैठते, बल्कि खुद भी उन प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिकों में जाकर मरीजों का ऑपरेशन करते हैं**

प्रत्येक मरीज को रेफर करने और ऑपरेशन करने के बदले डॉक्टरों को भारी-भरकम मोटा कमीशन मिलता है।

हैरानी की बात यह है कि इस मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई बार राज्य सरकार के 181 राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। लेकिन अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।


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