जैव विविधता दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित


टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक के निर्देशानुसार रामनिवास पैरालिगल वॉलेन्टियर तालुका विधिक सेवा समिति टोड़ारायसिंह द्वारा उपखण्ड के ग्राम थडोली में जैव विविधता दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन कर लोगों को जागरूक किया गया। पैरालिगल वॉलेन्टियर रामनिवास ने बताया कि जैव विविधता दिवस की शुरुआत 22 मई 1992 को नैरोबी में ‘जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ हुआ था, जिसकी याद में जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर केवल हमारा अधिकार नहीं है, बल्कि हर छोटे-बड़े जीव का इस पारिस्थितिकी तंत्र का भी बराबर का महत्व है। जैव विविधता का महत्व के बारे में बताया कि मानव जीवन पूरी तरह से जैव विविधता पर निर्भर है। प्रकृति हमें अमूल्य संसाधन और सेवाएं प्रदान करती है। जीने के लिए शुद्ध हवा, पीने के लिए साफ पानी, उपजाऊ मिट्टी और पौष्टिक भोजन हमें इसी जैव विविधता से मिलता है। हमारी अधिकांश जीवन रक्षक दवाइयों विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों और सूक्ष्मजीवों से ही तैयार की जाती हैं। घने जंगल और महासागर कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर वैश्विक तापमान को नियंत्रित रखते हैं और प्राकृ तिक आपदाओं से हमारी रक्षा करते हैं। कृषि, मत्स्य पालन, पर्यटन और वानिकी जैसे बड़े उद्योग पूरी तरह से समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र पर टिके हैं, जो दुनिया की आधी से अधिक आबादी को आजीविका देते हैं। उन्होंने कहा कि आज आधुनिकता, औद्योगिकीकरण और इंसानी लालच के कारण जैव विविधता का विनाश हो रहा, जिसके मुख्य कारण सडक़ों, फैक्ट्रियों और शहरों को बसाने के लिए हर साल करोड़ों हेक्टेयर जंगलों को बेरहमी से काटा जा रहा है, जिससे वन्यजीव बेघर हो रहे हैं। वन्यजीवों के अंगों, खाल और कस्तूरी जैसी चीजों के लिए जानवरों का अवैध शिकार धड़ल्ले से जारी है। प्लास्टिक प्रदूषण, रासायनिक कचरा और तेजी से बढ़ता तापमान समुद्री व मैदानी जीवों के अस्तित्व को मिटा रहा है। रामनिवास ने बताया कि जैव विविधता का संरक्षण अब केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य बन चुका है। जैव विविधता को बचाने के लिए हमें अधिक से अधिक स्वदेशी पेड़ लगाने चाहिए ताकि स्थानीय पक्षियों और कीटों को प्राकृतिक आवास मिल सके। सिंगल-यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करना होगा ताकि हमारे जलस्रोत और मिट्टी प्रदूषित न हों। राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों के बढ़ावे में सहयोग प्रदान को बढ़ावा देना चाहिए। जैव विविधता पृथ्वी की वह अनमोल पूंजी है, जिसके बिना मानव सभ्यता का अंत निश्चित है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। शिविर के दौरान ग्राम थडोली के ग्रामीण उपस्थित रहें। बृजमोहन शर्मा सचिव तालुका विधिक सेवा समिति टोड़ारायसिंह ने बताया कि इस दौरान संभागियों में उत्साह देखा गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौजूद रहें।        


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