टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। आगामी खरीफ फसल की बुआई को देखते हुए किसानों को खेतों की वैज्ञानिक तरीके से तैयारी करने तथा मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई। कृषि सेवा केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में सहायक कृषि अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अच्छी पैदावार के लिए बुआई से पहले खेतों का उचित प्रबंधन और मिट्टी की जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खेतों में हंकाई (गहरी जुताई) अवश्य करनी चाहिए। इससे खेतों में मौजूद खरपतवार, कीटों के भूमिगत लार्वा तथा अन्य हानिकारक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल को बेहतर वातावरण मिलता है। साथ ही खेतों में नमी संरक्षण और मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है। शर्मा ने किसानों से अपने खेतों की मिट्टी का समय पर परीक्षण करवाने का आह्वान करते हुए कहा कि मृदा परीक्षण से मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों तथा उनकी कमी की सही जानकारी मिलती है। इसके आधार पर किसान जिप्सम सहित अन्य आवश्यक सूक्ष्म एवं स्थूल पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है और अनावश्यक उर्वरक खर्च से भी बचाव होता है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ देशी खाद एवं गोबर खाद के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैविक खाद के नियमित प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है, जैविक गतिविधियां बढ़ती हैं तथा लंबे समय तक भूमि की उत्पादकता सुरक्षित रहती है। इससे फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए खरीफ फसलों की उन्नत खेती, पोषक तत्व प्रबंधन और मृदा संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा कीं। इस अवसर पर सहायक कृषि अधिकारी मांदोलाई, कृषि पर्यवेक्षक कूकड़, कृषि पर्यवेक्षक भांवता सहित क्षेत्र के अनेक किसान उपस्थित रहे।
खरीफ बुआई से पहले करें खेतों की वैज्ञानिक तैयारी, मिट्टी परीक्षण जरूरी : राजेंद्र शर्मा
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