टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। जैन साधु-संतों के पदविहार (पदयात्रा) के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने एवं देशव्यापी ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू किए जाने को लेकर सकल जैन समाज टोड़ारायसिंह की ओर से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार राहुल पारीक को दिया। ज्ञापन में बताया कि संपूर्ण भारतवर्ष का जैन समाज एवं अहिंसा प्रेमी नागरिक हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा जिले में घटित अत्यंत दु:खद एवं हृदयविदारक सडक़ दुर्घटना से अत्यंत व्यथित एवं मर्माहत हैं। उक्त दुर्घटना में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महामुनिराज की सुयोग्य शिष्याएँ-दिगम्बर जैन आर्यिका माताजी श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका माताजी उपशममति माताजी-का आकस्मिक समाधि-मरण हो जाना समस्त समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक एवं अपूरणीय क्षति है। ज्ञापन में बताया कि जैन धर्म के साधु-साध्वी आजीवन पदयात्री होते हैं। वे पूर्ण अहिंसा, संयम एवं तपस्या का पालन करते हुए नंगे पैर देशभर में धर्म, शांति, सद्भाव एवं व्यसनमुक्ति का संदेश प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख मार्गों पर अत्यधिक यातायात दबाव, तेज गति एवं लापरवाह वाहन संचालन के कारण जैन साधु-संतों के साथ दुर्घटनाओं की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। विगत वर्षों में भी अनेक संतों को ऐसी दुर्घटनाओं में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी है। जैन संत संपूर्ण देश में सतत पदविहार करते हैं, अत: उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल समाज का ही नहीं, बल्कि शासन एवं प्रशासन का भी नैतिक तथा संवैधानिक दायित्व है। तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की। जिनमें केंद्र एवं राज्य स्तर पर ‘संत सुरक्षा नीति’ का निर्माण कर पदविहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं सुरक्षा प्रावधान लागू किए जाए, जैन संतों के पदविहार के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा अनिवार्य रूप से पुलिस एस्कॉर्ट/होमगार्ड/सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, एक थाना क्षेत्र से दूसरे थाना क्षेत्र में प्रवेश के समय संबंधित पुलिस थानों के मध्य पूर्व समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखी जाए, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं मुख्य मार्गों पर पदयात्रियों हेतु सुरक्षित लेन, संकेतक, रिफ्लेक्टर एवं आवश्यक वैरिकेडिंग की समुचित व्यवस्था की जाए, रीवा दुर्घटना सहित पूर्व में हुई ऐसी समस्त घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी वाहन चालकों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही बताया कि जैन साधु-संत हमारे राष्ट्र की अमूल्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित होना चाहिए। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ संज्ञान लेते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय प्रदान करेंगे, जिससे भविष्य में ऐसी दु:खद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। जिला युवा मंत्री और समाज प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि इस अवसर पर ज्ञापन देने में सरावगी समाज जिला अध्यक्ष संत कुमार जैन, अग्रवाल समाज अध्यक्ष महावीर प्रसाद, कनोई अग्रवाल समाज 84 ब्लॉक अध्यक्ष पदम चंद जैन, भागचंद ओसवाल, अशोक झण्डा, मोहन कनोई, चंद्र प्रकाश ढाबा वाले, अविनाश बाकलीवाल, जंबू अजमेर वाले, नीरज छाबड़ा, जीवंधर झण्डा, मुकेश कनोई, गुड्डू कनोई, नरेश झण्डा, विकास कालेड़ा, अनुज कासलीवाल, सुमित बाकलीवाल, राहुल कासलीवाल, निर्मेश कासलीवाल, हनुमान कनोई, कैलाश ढ़ाबा वाले, धनराज सर्राफ, दिनेश बाकलीवाल, राजेंद्र भावता वाले, रज्जू सर्राफ, शुभम सर्राफ, भागचंद, संजीव कासलीवाल, मयंक कासलीवाल, अभिषेक सर्राफ, पन्ना कासलीवाल, बसन्ती लाल छाबड़ा, भानु झण्डा सहित सैंकड़ों की संख्या में सकल जैन समाज के पुरुष और महिला उपस्थित थे।
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। जैन साधु-संतों के पदविहार (पदयात्रा) के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने एवं देशव्यापी ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू किए जाने को लेकर सकल जैन समाज टोड़ारायसिंह की ओर से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार राहुल पारीक को दिया। ज्ञापन में बताया कि संपूर्ण भारतवर्ष का जैन समाज एवं अहिंसा प्रेमी नागरिक हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा जिले में घटित अत्यंत दु:खद एवं हृदयविदारक सडक़ दुर्घटना से अत्यंत व्यथित एवं मर्माहत हैं। उक्त दुर्घटना में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महामुनिराज की सुयोग्य शिष्याएँ-दिगम्बर जैन आर्यिका माताजी श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका माताजी उपशममति माताजी-का आकस्मिक समाधि-मरण हो जाना समस्त समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक एवं अपूरणीय क्षति है। ज्ञापन में बताया कि जैन धर्म के साधु-साध्वी आजीवन पदयात्री होते हैं। वे पूर्ण अहिंसा, संयम एवं तपस्या का पालन करते हुए नंगे पैर देशभर में धर्म, शांति, सद्भाव एवं व्यसनमुक्ति का संदेश प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख मार्गों पर अत्यधिक यातायात दबाव, तेज गति एवं लापरवाह वाहन संचालन के कारण जैन साधु-संतों के साथ दुर्घटनाओं की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। विगत वर्षों में भी अनेक संतों को ऐसी दुर्घटनाओं में अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी है। जैन संत संपूर्ण देश में सतत पदविहार करते हैं, अत: उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना केवल समाज का ही नहीं, बल्कि शासन एवं प्रशासन का भी नैतिक तथा संवैधानिक दायित्व है। तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की। जिनमें केंद्र एवं राज्य स्तर पर ‘संत सुरक्षा नीति’ का निर्माण कर पदविहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश एवं सुरक्षा प्रावधान लागू किए जाए, जैन संतों के पदविहार के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा अनिवार्य रूप से पुलिस एस्कॉर्ट/होमगार्ड/सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, एक थाना क्षेत्र से दूसरे थाना क्षेत्र में प्रवेश के समय संबंधित पुलिस थानों के मध्य पूर्व समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखी जाए, राष्ट्रीय राजमार्गों एवं मुख्य मार्गों पर पदयात्रियों हेतु सुरक्षित लेन, संकेतक, रिफ्लेक्टर एवं आवश्यक वैरिकेडिंग की समुचित व्यवस्था की जाए, रीवा दुर्घटना सहित पूर्व में हुई ऐसी समस्त घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी वाहन चालकों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही बताया कि जैन साधु-संत हमारे राष्ट्र की अमूल्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित होना चाहिए। हमें पूर्ण विश्वास है कि आप इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ संज्ञान लेते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय प्रदान करेंगे, जिससे भविष्य में ऐसी दु:खद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। जिला युवा मंत्री और समाज प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि इस अवसर पर ज्ञापन देने में सरावगी समाज जिला अध्यक्ष संत कुमार जैन, अग्रवाल समाज अध्यक्ष महावीर प्रसाद, कनोई अग्रवाल समाज 84 ब्लॉक अध्यक्ष पदम चंद जैन, भागचंद ओसवाल, अशोक झण्डा, मोहन कनोई, चंद्र प्रकाश ढाबा वाले, अविनाश बाकलीवाल, जंबू अजमेर वाले, नीरज छाबड़ा, जीवंधर झण्डा, मुकेश कनोई, गुड्डू कनोई, नरेश झण्डा, विकास कालेड़ा, अनुज कासलीवाल, सुमित बाकलीवाल, राहुल कासलीवाल, निर्मेश कासलीवाल, हनुमान कनोई, कैलाश ढ़ाबा वाले, धनराज सर्राफ, दिनेश बाकलीवाल, राजेंद्र भावता वाले, रज्जू सर्राफ, शुभम सर्राफ, भागचंद, संजीव कासलीवाल, मयंक कासलीवाल, अभिषेक सर्राफ, पन्ना कासलीवाल, बसन्ती लाल छाबड़ा, भानु झण्डा सहित सैंकड़ों की संख्या में सकल जैन समाज के पुरुष और महिला उपस्थित थे।
