ब्रह्माकुमारीज टोंक में ‘ममता से महाशक्ति तक’ कार्यक्रम के माध्यम से नारी जागरण, संस्कार और परिवार निर्माण का दिया संदेश


मातृ दिवस पर ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माताओं का हुआ विशेष सम्मान, वक्ताओं ने बताया नारी शक्ति का महत्व

 टोंक (सच्चा सागर)।  मातृ दिवस के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, शाखा टोंक के राजयोग भवन में मातृ स्वरूप: ममता से महाशक्ति तक विषय पर आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मातृशक्ति के सम्मान हेतु विशेष समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रत्येक माता को ससम्मान मंच पर आमंत्रित कर ईश्वरीय सौगात भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर शहर की बड़ी संख्या में माताओं एवं बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को गरिमामयी बनाया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा जिला महामंत्री नीलिमा सिंह आमेरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि माता का स्वरूप स्वयं ईश्वर के समान होता है। एक माँ ही बच्चे के जीवन में संस्कारों का बीजारोपण कर उसे श्रेष्ठ नागरिक बनाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में मातृशक्ति की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही उन्होंने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था आधुनिक युग में भी समाज को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित कर रही है तथा विभिन्न सामाजिक सरोकारों के माध्यम से समाज निर्माण का श्रेष्ठ कार्य कर रही है। स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी अपर्णा दीदी ने कहा कि वंदे मातरम हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है। मां परिवार की वह शक्ति है, जो हर सदस्य को भावनात्मक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि नारी यदि स्वयं को पहचान ले और अपने भीतर की दिव्य शक्तियों को जागृत कर ले, तो वह स्वर्ग के द्वार खोलने वाली देवी बन सकती है। दीदी ने उपस्थित सभी को राजयोग मेडिटेशन की गहन अनुभूति भी करवाई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। माहेश्वरी समाज की जिला अध्यक्ष रेखा जाजू ने कहा कि मां शब्द सुनते ही मन में स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व की भावना जागृत हो जाती है। माँ केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन की पहली गुरु, मित्र और मार्गदर्शक होती है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के जीवन में मोबाइल और टीवी संस्कारों का स्थान लेते जा रहे हैं, जिसका उनके मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपने व्यर्थ समय को बच्चों के साथ बिताकर उनमें अच्छे संस्कार विकसित करने में लगाना चाहिए। पुरानी टोंक सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी ऋतु दीदी ने कहा कि माँ का प्रेम जीवनभर समान रूप से बना रहता है। उसकी शुभभावनाएँ हर परिस्थिति में अपने बच्चों के साथ रहती हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि जब बच्चे छोटे होते हैं तो कहते हैं माँ मेरी है, लेकिन बड़े होने पर वही बच्चे कहते हैं  माँ तेरी है। एक मां चार बच्चों का पालन-पोषण कर सकती है, लेकिन आज चार बच्चे भी एक माँ की सेवा करने में असमर्थ दिखाई देते हैं। इसलिए आज आवश्यकता है कि बच्चों को ऐसे संस्कार दिए जाएँ, जो केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें। एडवोकेट रमा चौधरी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान ने सदैव मातृशक्ति और महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति हर प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाओं से संपन्न होने के बावजूद मन में ईष्र्या, द्वेष और अशांति अनुभव कर रहा है। ऐसे समय में राजयोग मेडिटेशन ही वह मार्ग है, जो मनुष्य को सच्ची शांति, आत्मिक शक्ति और वास्तविक खुशी प्रदान कर सकता है। योग शिक्षिका शशि कटारिया ने कहा कि एक शक्तिशाली और संस्कारित नारी ही परिवार, समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। अपने श्रेष्ठ गुणों और संस्कारों से वह आने वाली पीढ़ी को उज्ज्वल भविष्य प्रदान करती है। कार्यक्रम के दौरान कुमारी एकता एवं कृति ने सुंदर एवं मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। पूरा वातावरण मातृशक्ति के सम्मान, आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

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