घाड़ की अरावली पहाडिय़ों में धड़ल्ले से अवैध खनन, ऐतिहासिक धरोहरों पर मंडराया खतरा



-महावीर प्रसाद भाटी

घाड़ (सच्चा सागर)। देवली उपखंड क्षेत्र के घाड़ थाना इलाके की अरावली पहाडिय़ों में दिन-दहाड़े भारी मात्रा में चिनाई पत्थरों के अवैध खनन और ट्रैक्टरों से परिवहन का खेल वर्षों से जारी है। प्रशासन और वन विभाग की चुप्पी के चलते घाड़ की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार अरावली पहाड़ की सुरक्षा के लिए स्थापित घाड़ वनरक्षक चौकी पर हमेशा ताला लगा रहता है। लोगों का कहना है कि यह चौकी केवल कागजों में सिमटकर रह गई है, जबकि यहां शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि घाड़ पुलिस थाना भी अरावली पहाडिय़ों से मात्र एक किलोमीटर दूरी पर स्थित है, लेकिन इसके बावजूद खनन माफियाओं में कानून का कोई भय नजर नहीं आता। पहाड़ी की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक पीर बाबा की मीनार और अन्य धार्मिक स्थलों के आसपास लगातार हो रहे अवैध खनन से इन धरोहरों के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पीर बाबा की मीनार के आसपास इसी तरह खनन जारी रहा तो पहाड़ के दरकने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे यह प्राचीन धरोहर कभी भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। हाल ही में विधानसभा क्षेत्र के ककोड़ कस्बे में आयोजित रात्रि चौपाल एवं जनसुनवाई कार्यक्रम में टोंक जिला कलेक्टर टीना डाबी की मौजूदगी में देवली-उनियारा विधायक राजेंद्र गुर्जर ने भी वन विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध खनन होने का आरोप लगाया था। विधायक ने सार्वजनिक रूप से विभाग पर खनन माफियाओं को संरक्षण देने की बात कही थी। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद कुछ समय में ही दोबारा उसी क्षेत्र में लौट आने की प्रवृत्ति बनी हुई है, जिससे कार्रवाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर मामले को लेकर कई बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन से अविलंब अवैध खनन पर रोक लगाने तथा लापरवाही बरतने वाले वन विभाग एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यावरण को बचाया जा सके।       


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