टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे के भूडा के बालाजी मंदिर परिसर में बुधवार को अपरा एकादशी के पावन अवसर पर महिलाओं ने भगवान विष्णु एवं श्रीराम-जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना कर भजन-कीर्तन किया। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने व्रत रखकर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर महंत भगवान दास महाराज एवं पुजारी गोपाल वैष्णव ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा या अचला एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र एकादशी मानी जाती है, जो पापों का नाश कर अपार पुण्य प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, केदारनाथ दर्शन और ग्रहण काल में दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा, व्रत एवं रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने बताया कि अधिक मास (खर मास) होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है।
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे के भूडा के बालाजी मंदिर परिसर में बुधवार को अपरा एकादशी के पावन अवसर पर महिलाओं ने भगवान विष्णु एवं श्रीराम-जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना कर भजन-कीर्तन किया। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने व्रत रखकर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर महंत भगवान दास महाराज एवं पुजारी गोपाल वैष्णव ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा या अचला एकादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र एकादशी मानी जाती है, जो पापों का नाश कर अपार पुण्य प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से गंगा स्नान, केदारनाथ दर्शन और ग्रहण काल में दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा, व्रत एवं रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने बताया कि अधिक मास (खर मास) होने से इसका महत्व और बढ़ जाता है।
