लंबी बीमारी के बाद जयपुर में ली अंतिम सांस, क्षेत्र में शोक की लहर, तीये की बैठक आज
घाड़ (सच्चा सागर)। क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता महावीर प्रसाद भाटी की धर्मपत्नी मंजू देवी का रविवार, 10 मई को प्रात: 6 बजे जयपुर के जेएनयू अस्पताल जगतपुरा, जयपुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर से घाड़ सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों ने गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। स्व. मंजू देवी का जन्म 20 जुलाई 1958 को बूंदी जिले के नैनवा कस्बे में हुआ था। उनके पिता स्व. प्रहलादराय एक अध्यापक थे तथा माता स्व. मेवा देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। पारिवारिक संस्कारों में पली-बढ़ी मंजू देवी बचपन से ही सरल, सहनशील और धार्मिक स्वभाव की थीं। उनका विवाह 30 जनवरी 1975 को घाड़ निवासी महावीर प्रसाद भाटी के साथ सम्पन्न हुआ। विवाह के पश्चात उन्होंने अपने ससुराल ग्राम घाड़, तहसील दूनी, जिला टोंक में रहते हुए परिवार को संभाला और सामाजिक रिश्तों को मजबूती प्रदान की। मंजू देवी अपने मधुर व्यवहार, मिलनसारिता और सेवा भाव के लिए जानी जाती थीं। वे हमेशा परिवार और समाज के लोगों के सुख-दु:ख में सहभागी रहती थीं। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र ने एक स्नेही और धर्मपरायण महिला को खो दिया है। परिवार की जानकारी के अनुसार स्व. मंजू देवी पांच भाई-बहनों में तीसरे क्रम की संतान थीं। उनके परिवार में बड़ी बहन ललिता देवी सहित अन्य भाई-बहन हैं, उन्होंने अपने जीवनकाल में पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ किया। स्व. मंजू देवी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी पांच पुत्रियां हैं नीलम देवी, प्रियंका, अन्तिमा देवी, कनक भाट एवं मीनाक्षी। इनमें से अधिकांश पुत्रियों का विवाह हो चुका है, जबकि एक पुत्री अविवाहित है। परिवारजनों के अनुसार, वे अपने बच्चों के प्रति अत्यंत स्नेही थीं और उनके संस्कारों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके तीये की बैठक मंगलवार, 12 मई को उनके निज निवास ग्राम घाड़, तहसील दूनी, जिला टोंक में आयोजित होगी, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, रिश्तेदारों और परिचितों के शामिल होने की संभावना है।
सामाजिक एवं राजनीतिक सक्रियता
महावीर प्रसाद भाटी लंबे समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और दैनिक सच्चा सागर के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। वे भारतीय जनता पार्टी से भी जुड़े रहे हैं तथा घाड़ इकाई अध्यक्ष रहते हुए वर्षों तक पार्टी संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1990 के राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे 9 दिनों तक उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ केंद्रीय कारागार में भी रहे।
