देवली-उनियारा में पेयजल संकट को लेकर नरेश मीणा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


कलेक्टर के आश्वासन पर स्थगित किया अनिश्चितकालीन धरना

पानी के मुद्दे पर जनता की मजबूत आवाज बने नरेश मीणा, प्रशासन ने सात दिन में समाधान का दिया भरोसा

टोंक (सच्चा सागर)।  देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में व्याप्त गंभीर पेयजल संकट को लेकर किसान नेता एवं भगत सिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा सोमवार को टोंक कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर द्वारा समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद मीणा ने प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना स्थगित करने की घोषणा की। नरेश मीणा ने बताया कि वे क्षेत्र की पेयजल समस्या को लेकर अनिश्चितकालीन धरना देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर टीना डाबी ने पहले ही संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुला ली थी। बैठक में देवली-उनियारा क्षेत्र की पेयजल समस्या पर विस्तृत चर्चा करते हुए त्वरित समाधान के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया और प्रशासन की ओर से शीघ्र राहत पहुंचाने का भरोसा दिया गया। मीणा ने आरोप लगाया कि यह टोंक जिले का दुर्भाग्य है कि जिले से ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद पूरा जिला भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाना पड़ रहा है, जबकि कई गांवों में खारा एवं फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूरी बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बांध के निर्माण के कारण सैकड़ों गांवों को विस्थापन झेलना पड़ा, लेकिन विडंबना यह है कि उसी बांध का पानी अन्य जिलों को उपलब्ध कराया जा रहा है और टोंक जिला आज भी पेयजल संकट से जूझ रहा है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक असंतुलन करार दिया। कलेक्टर टीना डाबी ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य स्तर से बजट जारी नहीं होने के कारण कई ठेकेदारों ने कार्य रोक रखे हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने गर्मी को देखते हुए 60 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर पेयजल संकटग्रस्त गांवों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने तथा आवश्यक स्थानों पर नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने सात दिवस के भीतर स्थिति में सुधार लाने का आश्वासन भी दिया है। ज्ञापन में पेयजल संकट के साथ-साथ ईआरसीपी परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन नहर के कार्य, किसानों को मुआवजा नहीं मिलने तथा सरोली मोड़ पंचायत क्षेत्र में बरसात के दौरान जलभराव से फसलों को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। कलेक्टर ने इन सभी विषयों को शासन स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने तथा किसानों को राहत दिलाने का भरोसा दिलाया। नरेश मीणा ने कहा कि जिले से पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी एवं ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, जो टोंक जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं, के रहते हुए भी पानी और बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के साथ हुई चर्चा सकारात्मक रही है, इसलिए फिलहाल धरना स्थगित किया गया है, लेकिन यदि समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से नहीं हुआ तो पुन: आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। गौरतलब है कि नरेश मीणा ने इस मुद्दे को लेकर सोमवार को अकेले ज्ञापन देने एवं धरना देने की घोषणा की थी, लेकिन उनकी अपील के बाद बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गए। इस दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

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