टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे के भूडा बालाजी मंदिर में श्रीराम और माता जानकी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान चल रही रामकथा, भक्त माल और रामलीला में विभिन्न प्रसंगों को विस्तार से बताया। कथा वाचक रामसुखदास महाराज वेदांती ने कथा में हनुमान का भगवान राम से मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध, माता अनसूया का ज्ञान, शबरी के झूठे बेर खाने, माता सीता की खोज तथा हनुमान की लंका दहन प्रसंग सुनाया। कथा में बताया कि भगवान के दर्शन के लिए भक्ति करना चाहिए और भक्ति से ही भगवान के दर्शन संभव है। उन्होंने कहा कि भक्ति दो तरह से की जाती है, एक उपासना और दूसरी साधु-संतों की सेवा से। साधु-संतों की सेवा करने वाले को भगवान गले लगाते हैं। कथा में बताया कि भगवान ने कहा कि मैं ही साधु और साधु ही भगवान है। उन्होंने कहा कि राजा रायमल ने साधु-संतों की सेवा से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। संगीतमय राम कथा में बताया कि भगवान राम शबरी माता आश्रम पहुंचे और सबरी मां के झूठे बैर खाएं वहीं लक्ष्मण ने बैर नहीं खाएं जो बाद में संजीवनी बूटी बनकर लक्ष्मण के प्राणदायक बनी। इस दौरान सती अनुसूया का ज्ञान और ऋषि मूक पर्वत पर सुग्रीव मित्रता और बाली वध का वृत्तांत सुनाया। सीता माता की खोज के लिए राम भक्त हनुमान को जामवंत ने याद दिलाया और विशाल रूप धारण कर लंका सात योजन समुंदर पार कर लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में मां सीता का दर्शन किए तथा लंका दहन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे के भूडा बालाजी मंदिर में श्रीराम और माता जानकी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान चल रही रामकथा, भक्त माल और रामलीला में विभिन्न प्रसंगों को विस्तार से बताया। कथा वाचक रामसुखदास महाराज वेदांती ने कथा में हनुमान का भगवान राम से मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध, माता अनसूया का ज्ञान, शबरी के झूठे बेर खाने, माता सीता की खोज तथा हनुमान की लंका दहन प्रसंग सुनाया। कथा में बताया कि भगवान के दर्शन के लिए भक्ति करना चाहिए और भक्ति से ही भगवान के दर्शन संभव है। उन्होंने कहा कि भक्ति दो तरह से की जाती है, एक उपासना और दूसरी साधु-संतों की सेवा से। साधु-संतों की सेवा करने वाले को भगवान गले लगाते हैं। कथा में बताया कि भगवान ने कहा कि मैं ही साधु और साधु ही भगवान है। उन्होंने कहा कि राजा रायमल ने साधु-संतों की सेवा से ही भगवान की प्राप्ति संभव है। संगीतमय राम कथा में बताया कि भगवान राम शबरी माता आश्रम पहुंचे और सबरी मां के झूठे बैर खाएं वहीं लक्ष्मण ने बैर नहीं खाएं जो बाद में संजीवनी बूटी बनकर लक्ष्मण के प्राणदायक बनी। इस दौरान सती अनुसूया का ज्ञान और ऋषि मूक पर्वत पर सुग्रीव मित्रता और बाली वध का वृत्तांत सुनाया। सीता माता की खोज के लिए राम भक्त हनुमान को जामवंत ने याद दिलाया और विशाल रूप धारण कर लंका सात योजन समुंदर पार कर लंका पहुंचे और अशोक वाटिका में मां सीता का दर्शन किए तथा लंका दहन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

