500 वर्ष पुरानी आस्था का केंद्र है भूडा बालाजी मंदिर



11 मई को होगी राम-जानकी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा 

टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कस्बे में शहरी चार दीवारी से बाहर पश्चिम दिशा में बागात की ओर प्राचीन काल से करीब 5 सौ साल पहले भूडा बालाजी की मूर्ति तत्कालीन विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्थापित की गई थी। गत 3 से 11 मई तक भूडा बालाजी मंदिर परिसर में श्रीराम और माता जानकी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है, जिसमें अखिल भारतीय चतु सम्प्रदाय अध्यक्ष हनुमान दास महाराज, बालयोगी तुलसी दास महाराज, महंत भगवान दास महाराज के सानिध्य में नव दिवसीय नौ कुण्डात्मक श्रीराम महायज्ञ आयोजित किया जा रहा। रजवाडा काल से ही भूडा बालाजी की दूर दूर तक मान्यता रहीं हैं। तत्कालीन राज परिवार भी भूडा बालाजी के दर्शन किया करते थे। तब बालाजी मूर्ति खुले में चबूतरा पर विराजमान रहें। कालान्तर में मंदिर निर्माण समितियों का गठन किया गया, लेकिन आशानुरूप विकास नहीं हो सका। इसके पश्चात मंदिर निर्माण में करीब 4 दशक से गठित समिति में स्व. कपूर चंद ढाबा वाले, स्व. रमेश चंद ढाबा वाले, स्व. रामप्रसाद चौबे के पश्चात मुन्ना लाल गुरजी, पं. आत्माराम गुरजी, अशोक कुमार सैनी, पं. बनवारी लाल पाराशर, सत्यनारायण बलरेवा, राजू लाल सैनी जयपुर, कालूराम गौड़, रमेश तिवाड़ी तथा योगेश भटनागर अल्पना ज्वैलर्स जयपुर का विशेष सहयोग रहा। मंदिर समितिे ने बताया कि परम ब्रह्मलीन बाबा संत रामकिशोर दास महाराज महात्यागी, जो कि 18 साल निराहार रहकर तपस्या की और उनके द्वारा संकल्पित राम जानकी, लक्ष्मण तथा हनुमान की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गत सप्ताह भर से भव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव चल रहा है। हालांकि संत रामकिशोर दास महाराज और उनके कृपा पात्र शिष्य सीताराम दास महात्यागी ब्रह्म लोक लीन हो गए, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा अनुसार समिति ने निर्णय लिया कि भगवान राम और माता जानकी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा की जाएं। जो 11 मई तंदनुसार ज्येष्ठ कृष्ण 2083 नवमी शतभिषा नक्षत्र में स्थापना की जाएगी। इसके लिए भव्य तैयारियां की जा रही है। जिसमें बड़ी संख्या में भामाशाहों, दानदाताओं तथा आम श्रद्धालु तन मन धन से समर्पित भाव के साथ लगे हुए हैं। इससे पहले पं रामजीलाल पाण्डेता और हेमराज राहुल्या द्वारा शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई।     

भूडा बालाजी नाम क्यों पड़ा  

प्राचीन काल में टोड़ारायसिंह कस्बे के दक्षिण दिशा में तक्षकगिरी पहाड़ स्थित है, तत्कालीन समय में आंधी तूफान से पहाड़ के पश्चिम दिशा में उड़ती धूल के बड़े बड़े टीले बन गए और इन्हीं टीलों के बीच बालाजी स्थापित किए गए। इसी वजह से भूडा बालाजी कहलाए, लेकिन समय के सब बदल गया और वर्तमान में घनी आबादी बस गए। इस मंदिर में समय-समय पर अखण्ड रामचरित मानस पाठ, रामधुनी, चैत्र और आश्विन नवरात्र पाठ दशकों से होते आ रहे हैं। मंदिर में साल में चार बड़े आयोजन किए जाते हैं, जिनमें गुरु पूर्णिमा, हनुमान जयंती, पोष बड़ा तथा अन्नकूट शामिल हैं। अखिल भारतीय चतु सम्प्रदाय अध्यक्ष हनुमान दास महाराज, यज्ञाकर्ता बालयोगी तुलसी दास महाराज तथा महामण्डलेश्वर भगवान दास महाराज त्यागी के सानिध्य में यज्ञ समिति अध्यक्ष संत कुमार जैन, कोषाध्यक्ष जगन्नाथ मोदी, संजय मोदी, महामंत्री जगदीश प्रसाद पाण्डेता, संगठन मंत्री अशोक सैनी, मुन्ना लाल शर्मा, सत्यनारायण बलरेवा, बनवारी पाराशर तथा आम श्रद्धालु के सहयोग से 3 मई से चल रहे श्रीराम महायज्ञ और श्रीराम और माता जानकी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिदिन कथा वाचक सुखराम दास महाराज वेदांती की ओर से श्रीमद् भागवत पारायण कथा, शिव महापुराण कथा, रामकथा और भक्त माल कथा की जा रही है। वहीं प्रतिदिन भगवान राम और माता जानकी, लक्ष्मण की मूर्तियों को विभिन्न वास भावना की जा रही है। भूडा बालाजी मंदिर जन जन के आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।        


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