नोहटा वन चौकी के सामने ‘खनन राज’!



फोरेस्टर और गाडऱ् की मिलीभगत से चिरमी डूंगरी दर्रा में अवैध खनन का खेल बेखौफ जारी

निवाई (सच्चा सागर)। उपखंड क्षेत्र की निवाई रेंज के अंतर्गत सिरस नाका स्थित नोहटा वन चौकी के सामने चिरमी डूंगरी दर्रा इन दिनों अवैध खनन माफियाओं का सुरक्षित अड्डा बनता जा रहा है। आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार कर्मचारियों की खुली मिलीभगत से यहां दिन-रात सफेद पत्थरों का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। इतना ही नहीं, प्लांटेशन क्षेत्र में हरे-भरे वृक्षों की भी बेरहमी से कटाई करवाई जा रही है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। ग्रामीणों और वनप्रेमियों का आरोप है कि नोहटा प्रथम क्षेत्र के चेकडैम नंबर 04 में स्थित सफेद पत्थरों पर खनन माफियाओं की नजर लंबे समय से है, लेकिन इस पूरे खेल को संरक्षण देने का काम वन विभाग के फोरेस्टर मोहन मीणा और गार्ड ओमप्रकाश द्वारा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतनी बड़ी स्तर पर अवैध खनन संभव ही नहीं है।  

रात के अंधेरे में चलता है ‘खनन सिंडिकेट’

ग्रामीणों के अनुसार रात्रि के समय जेसीबी, डंपर और ब्लास्टिंग मशीनों की आवाजें पूरे क्षेत्र में गूंजती हैं, लेकिन वन विभाग की आंखें बंद रहती हैं। आरोप है कि खनन माफिया रात के अंधेरे में पहाडिय़ों को छलनी कर सफेद पत्थरों का अवैध उत्खनन करते हैं और फिर भारी वाहनों से उनका परिवहन कर दिया जाता है। वनप्रेमियों ने बताया कि यह सब कुछ नोहटा वन चौकी के सामने हो रहा है, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर संदेह पैदा करता है। लोगों का कहना है कि जब चौकी के सामने ही यह सब खुलेआम हो रहा है, तो विभाग की चुप्पी साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों का आरोप है कि फोरेस्टर मोहन मीणा और गार्ड ओमप्रकाश ने खनन माफियाओं से सांठगांठ कर पूरे क्षेत्र को ‘कमाई का जरिया’ बना दिया है। कथित रूप से मोटी रकम लेकर अवैध खनन और परिवहन को संरक्षण दिया जा रहा है।       

हरे वृक्षों पर भी चला लालच का कुल्हाड़ा

केवल खनन ही नहीं, बल्कि प्लांटेशन क्षेत्र में खड़े हरे-भरे पेड़ों को भी नहीं बख्शा जा रहा। आरोप है कि कोयला व्यापारियों से मोटी रकम लेकर वन क्षेत्र में हरे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई करवाई जा रही है। इससे वन संपदा तेजी से नष्ट हो रही है और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन अधिकारियों पर जंगल बचाने की जिम्मेदारी है, वही जंगल को बेचने में लगे हैं। यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के साथ खुला विश्वासघात है। वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और खनन के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।                 

वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति में ‘खुला खेल’

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टोंक डीएफओ और निवाई रेंजर के अवकाश पर जाने के बाद फोरेस्टर मोहन मीणा और गार्ड ओमप्रकाश ने मौके का भरपूर फायदा उठाया। वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति में अवैध खनन और वृक्ष कटाई का खेल और अधिक तेज हो गया। लोगों का कहना है कि विभागीय निगरानी कमजोर होते ही इन कर्मचारियों ने खनन माफियाओं को खुली छूट दे दी। जेसीबी, डंपर और ब्लास्टिंग मशीनों के जरिए वन क्षेत्र को खोखला किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और दोषी कर्मचारियों—फोरेस्टर मोहन मीणा एवं गार्ड ओमप्रकाश के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्यवही नहीं हुई, तो क्षेत्र में जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। वनप्रेमियों का स्पष्ट कहना है कि यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि सरकारी संरक्षण में प्राकृतिक संसाधनों की लूट का है। यदि जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि जंगल बचाने वाले ही जंगल उजाडऩे में लगे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है।     


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