रीवा सडक़ हादसे में आर्यिका श्रुतमति माताजी व उपसममति माताजी की समाधि


जैन समाज में शोक

निवाई (सच्चा सागर)। आचार्य विद्यासागर महाराज से दीक्षित आर्यिका श्रुतमति माताजी व उपसममति माताजी की बुधवार सुबह रीवा के पास सडक़ दुर्घटना में समाधि हो जाने पर जैन समाज में रोष व्याप्त है। आर्यिका माताजी सुबह जंगल शौच के लिए जा रही थी, उसी समय किसी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया। जिससे उनकी समाधि हो गई। इस घटना को लेकर जैन समाज के कई संगठनों ने दु:ख व्यक्त किया है एवं प्रशासन से जैन साधुओं के विहार के समय सुरक्षा के ठोस प्रबंध किए जाने की मांग की है। रीवा दुर्घटना से देशभर का जैन समाज स्तंभ है। इस दौरान जैन समाज निवाई ने संतों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। जैन समाज की प्रवक्ता राकेश संघी व सुनील भाणजा ने बताया कि आर्यिका श्रुतमति माताजी व उपसममति माताजी के समाधी के समाचार सुनकर जैन समाज निवाई में शोक की लहर दौड़ गई एवं दोनों शिष्याओ के निधन से सभी श्रद्धालु भावुक हो गए। सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष नेमीचंद गंगवाल, मंत्री महावीरप्रसाद पराना, अग्रवाल मंदिर अध्यक्ष सुशील जैन आरामशीन, सरावगी के समाज के अध्यक्ष शिखरचंद काला, अग्रवाल समाज के अध्यक्ष विष्णु बोहरा, सरावगी समाज के जिला उपाध्यक्ष अमित कटारिया, युवा परिषद अध्यक्ष सुनिल भाणजा, मोहित चंवरिया, महेंद्र चंवरिया, हेमचंद संघी, अशोक बिलाला, महावीर माधोराजपुरा, ज्ञानचंद सोगानी, विमल सोगाणी, रिंकू झांझरी व मनोज पाटनी सहित दिगंबर जैन सरावगी समाज, दिगंबर जैन अग्रवाल समाज, राजस्थान जैन सभा, ज्ञानोदय संस्थान, अग्रवाल युवा परिषद् व खण्डेलवाल युवा परिषद् सहित अनेक महिला संगठनों ने आर्यिका श्रुतमति माताजी व उपसममति को विनयांजलि देकर गहरा दु:ख व्यक्त किया। समाधिस्थ दोनों माताजी वर्तमान में आर्यिका सौम्यमति माताजी के संघ में विराजमान थी। आर्यिका श्रुतमति माताजी की आर्यिका दीक्षा 13 फरवरी 2006 को सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य विद्यासागर महाराज के कर कमलों से हुई थी। 29 मई 1998 को भाग्योदय तीर्थ सागर में आचार्य विद्यासागर महाराज से उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य प्राप्त किया था। उच्च शिक्षण में माताजी ने एमएससी मानव शास्त्र व एमए संस्कृत से किया था। माताजी सागर नगर के रामपुरा निवासी थी।              


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