देवली में स्कूटी वितरण के 30 मिनट बाद ही उतरीं ‘मदद की बैसाखियां’
- विनोद धर्मानी
देवली (सच्चा सागर)। सरकारी योजनाओं की नीयत साफ होती है, लेकिन जमीन पर उतरते ही उनकी सूरत बदल जाती है। सोमवार को देवली में विधायक कोटे से हुए स्कूटी वितरण समारोह में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने ‘सच्चे लाभार्थी’ की परिभाषा पर ही सवालिया निशान लगा दिए। जिस स्कूटी को दिव्यांगजनों के पैरों की ताकत बनना था, वितरण के महज आधे घंटे बाद ही उसके ‘सपोर्टर व्हील’ (सहायक पहिए) औजारों की भेंट चढ़ गए। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा एक वीडियो शासन और प्रशासन की मंशा को आईना दिखा रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कूटी की चाबी मिलते ही दिव्यांगों के परिजन उन्हें वर्कशॉप की गलियों में ले गए और वहां सबसे पहले उन सपोर्टर व्हील्स को खुलवा दिया गया, जो एक दिव्यांग को संतुलन और सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह दृश्य देखकर हर कोई दंग है कि आखिर वितरण के तुरंत बाद इन पहियों को हटाने की इतनी जल्दी क्या थी? इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जानकारों का मानना है कि सपोर्टर व्हील हटाना इस बात का सीधा संकेत है कि इन गाडिय़ों का उपयोग अब दिव्यांगजन नहीं, बल्कि उनके घर के सामान्य सदस्य करेंगे। बिना सपोर्टर पहियों के एक गंभीर दिव्यांग के लिए स्कूटी चलाना लगभग असंभव है, ऐसे में यह साफ है कि ‘नाम दिव्यांग का और काम परिजनों का’ वाली कहावत यहाँ चरितार्थ हो रही है। कुछ लोग तो यहाँ तक आशंका जता रहे हैं कि स्कूटी को सामान्य लुक देकर उसे औने-पौने दामों में बेचने या निजी काम के लिए ‘मॉडिफाई’ करने की तैयारी की जा रही है। विधायक राजेन्द्र गुर्जर की ओर से दी गई इन स्कूटियों का उद्देश्य दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन पहिए हटते ही वह आत्मनिर्भरता कहीं पीछे छूटती नजर आई। लोगों का कहना है कि प्रशासन इन वायरल तस्वीरों पर संज्ञान लेगा या फिर कागजों में ‘लाभार्थी खुश हैं’ वाली रिपोर्ट दर्ज कर फाइल बंद कर दी जाएगी?
