केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का अंबार, धूप में तड़पते रहे छात्र-छात्राएं
टोंक (सच्चा सागर)। जिले में चल रही बीएड. परीक्षाओं के दौरान परीक्षार्थियों को भीषण गर्मी के बीच भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा केंद्रों की लापरवाही ने छात्र-छात्राओं की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। हालात ऐसे हैं कि दूर-दराज से आने वाले अभ्यर्थी चिलचिलाती धूप में परीक्षा केंद्रों के बाहर घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें परीक्षा प्रारंभ होने से एक घंटा पूर्व केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य है। छात्र-छात्राएं नियमों का पालन करते हुए समय से पहले पहुंच भी रहे हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर उन्हें अंदर प्रवेश परीक्षा शुरू होने से मात्र 15 से 20 मिनट पहले ही दिया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब प्रवेश समय पर नहीं देना है, तो छात्रों को एक घंटा पहले बुलाकर धूप में खड़ा रखने का क्या औचित्य है। सबसे चिंताजनक स्थिति निजी कॉलेजों में बने परीक्षा केंद्रों की है, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आ रहा है। केंद्रों के बाहर न तो बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही धूप से बचाव के लिए टेंट या शेड लगाए गए हैं। कई स्थानों पर छात्र पेड़ों की छाया तलाशते नजर आए, जबकि कुछ छात्र सडक़ किनारे खड़े होकर गेट खुलने का इंतजार करते रहे। गर्मी और लू के इस मौसम में ऐसी स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि केंद्रों पर कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ रहा है। जहां छात्रों को समय से पहले बुला लिया जाता है, वहीं कई परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी स्टाफ स्वयं पेपर शुरू होने से महज कुछ मिनट पहले ही पहुंचता है। इस दोहरे रवैये को लेकर छात्रों में नाराजगी देखी जा रही है। एक परीक्षार्थी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि हम दूर-दराज के गांवों से बसें बदलकर परीक्षा देने आते हैं। यहां पहुंचने के बाद पता चलता है कि कॉलेज के बाहर बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। तेज धूप में खड़े रहना किसी सजा से कम नहीं है। स्थिति को देखते हुए अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षार्थियों के लिए कम से कम छाया, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि जब प्रवेश परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही दिया जा रहा है, तो एक घंटा पहले बुलाने का औचित्य क्या है। साथ ही, यदि भीषण गर्मी में किसी छात्र की तबीयत बिगड़ती है या कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—विश्वविद्यालय प्रशासन की या संबंधित परीक्षा केंद्र की? परीक्षार्थियों ने मांग की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक निर्देश जारी करे, ताकि आने वाली परीक्षाओं में इस प्रकार की अव्यवस्थाओं से बचा जा सके और छात्रों को राहत मिल सके।