कोर्ट की फटकार के बाद दौड़ी जेसीबी, खेतों में खाइयां और खजाने पर डबल चोट
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। कोर्ट की फटकार के बाद जागा पीडब्ल्यूडी, लापरवाही से लाखों का नुकसान उजागर कुर्की आदेश के बाद हटाई सडक़ सामग्री, खातेदारों के खेतों में चला बुलडोजर, प्रशासन कटघरे में उपखण्ड क्षेत्र की ग्राम पंचायत भांवता से बीसलपुर विस्थापित कॉलोनी पथराज खुर्द को जोडऩे वाले आम रास्ते के विवाद ने अब गंभीर प्रशासनिक लापरवाही की परतें खोल दी हैं। न्यायालय की कड़ी फटकार और कुर्की आदेश पारित होने के बाद ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) हरकत में आया और आनन-फानन में चार जेसीबी मशीनें लगाकर बनाई गई कच्ची सडक़ की मिट्टी, गिट्टी व निर्माण सामग्री हटाने का काम शुरू किया गया। पीडि़त खातेदारों का आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग की सहायक अभियन्ता ने उनकी बार-बार आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए उनके खातेदारी खेतों से जबरन सडक़ निर्माण शुरू कर दिया था। मजबूर होकर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर सख्त नाराजगी जताते हुए सहायक अभियंता कार्यालय के खिलाफ कुर्की आदेश जारी कर दिए। इसके बाद ही विभाग सक्रिय हुआ।
क्या है पूरा मामला?
करीब तीन वर्ष पूर्व भांवता से पथराज खुर्द को जोडऩे के लिए पीडब्ल्यूडी द्वारा ग्रेवल सडक़ निर्माण कार्य शुरू किया गया था। लेकिन खातेदारों के विरोध और न्यायालय से मिले स्थगन आदेश के चलते कार्य बीच में ही रोक दिया गया। करीब एक वर्ष पूर्व ग्रामीणों की शिकायत पर तहसीलदार राहुल पारीक और पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता रोशन मीणा ने पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में रास्ता खुलवाया था, लेकिन कुछ समय बाद फिर खातेदारों ने रास्ता बंद कर दिया। खातेदारों ने बीसलपुर विस्थापित कॉलोनी पथराज खुर्द के सोनाथ धाकड़, छीतर धाकड़, रामधन धाकड़, महावीर धाकड़, धर्मराज धाकड़, कमलेश धाकड़, रूघनाथ धाकड़, लादूराम धाकड़ व मुकेश धाकड़ सहित अन्य खातेदारों ने अपने खेतों से सडक़ निर्माण में डाली गई मिट्टी, कंक्रीट व गिट्टी को खुद हटाया। हालांकि, इससे खेतों में गहरी खाइयां पड़ गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया और किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
लापरवाही से सरकार को लाखों का चूना
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। बिना स्थायी समाधान और कानूनी स्थिति स्पष्ट किए सडक़ निर्माण शुरू करना और फिर उसे अधूरा छोड़ देना—इससे सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पहले सडक़ निर्माण पर खर्च, फिर मशीनरी लगाकर उसी सामग्री को हटाना—यह दोहरी लागत सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही को दर्शाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरू से ही जमीन विवाद का समाधान कर लिया जाता, तो न तो सरकारी धन की बर्बादी होती और न ही किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती।
कोर्ट के आदेश के बाद ही टूटी नींद
न्यायालय द्वारा कुर्की आदेश जारी होने के बाद ही पीडब्ल्यूडी ने तेजी दिखाई और मौके पर जेसीबी लगाकर निर्माण सामग्री हटाने का कार्य शुरू किया। इससे साफ है कि विभाग ने पहले मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अब सवाल यह है कि आखिर बिना कानूनी स्पष्टता के सडक़ निर्माण का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया और इस नुकसान की जिम्मेदारी किस पर तय होगी?
जनता में आक्रोश, जवाबदेही तय करने की मांग
ग्रामीणों और खातेदारों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण न केवल किसानों को नुकसान हुआ, बल्कि सरकारी धन की भी खुली बर्बादी हुई है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नुकसान की भरपाई करवाने की मांग उठाई है।

