शिव महापुराण कथा में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब
टोड़ारायसिंह (सच्चा सागर)। उपखण्ड के संवारिया गांव स्थित स्वयंभू नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा स्थल पर सुबह से ही भगवान शिव के जयघोषों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। कथा के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में सराबोर नजर आए। कथा गायक पंडित बनवारीलाल दाधीच (बोराड़ा वाले) ने भगवान नीलकंठ महादेव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि भगवान शिव भक्तों की सच्ची आस्था और भक्ति से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव सुष्टि के कल्याण के लिए समय-समय पर विभिन्न स्वरूपों में अवतरित होकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। कथा में सृष्टि विस्तार, दक्ष प्रजापति द्वारा माता शिवा की आराधना, माता सती के रूप में अवतरण, भगवान शिव एवं सती विवाह तथा दक्ष यज्ञ के प्रसंगों का मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया। पंडित दाधीच ने बताया कि दक्ष यज्ञ में हुए अपमान से आहत होकर माता सती ने योगाग्नि द्वारा देह त्याग कर संसार को आत्मसम्मान और धर्म की रक्षा का संदेश दिया। कथा के इस प्रसंग को सुनकर कई बाद्धालुओं की आंखें नम हो नई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना मनुष्य को जीवन में संयम, धैर्य और सदाचार का मार्ग दिखाती है। शिव भक्ति से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है, बल्कि जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान भी प्राप्त होता है। कथा के दौरान कथा वाचक ने बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर का विशेष महत्व है और इसकी आराधना से भक्तों को पुण्य, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने बद्धालुओं को भगवान शिव के नाम का निरंतर स्मरण करने तथा धार्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्म लाभ अर्जित करते नजर आए। इस अवसर पर जगदीश चांद (सरपंच प्रतिनिधि), शिवराज पीतैआई, बैजनाथ एईएन, रघुनाथ पटवारी, रामप्रसाद साह, रतन ठेकेदार, रामेश्वर पलसाला, जगदीश पटेल, रोडू पटेल, प्रभु सांडीवाल, रामकिशन, रामबीर सांडीवाल, श्योजी कबाड़ी, मंगलाराम, जसराज सांडीवाल, रामस्वरूप प्रजापत, लक्ष्मीनारायण, रामजवतार जागिड़ एवं सुखलाल जाट सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहें।
