मालपुरा (सच्चा सागर)। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कलमंडा परिसर में शुक्रवार को हुई बारिश के बाद जलभराव की समस्या के कारण छात्र-छात्राओं का कक्षा कक्ष तक पहुंचने का मार्ग बाधित हो गया। इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जिला कलेक्टर को पत्र प्रेषित कर पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था एवं फुटपाथ निर्माण कराने की मांग की है। प्रधानाचार्य ने पत्र में बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3 जुलाई 2026 को हुई बारिश के बाद विद्यालय परिसर में एक फीट से अधिक पानी भर गया, जिससे परिसर के अंदर लगभग 100 से 125 मीटर तक का फुटपाथ जलमग्न हो गया। इसके कारण छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय स्टाफ को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि हर वर्ष जुलाई से सितंबर माह तक जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक कार्य बाधित होता है। उन्होंने जिला कलेक्टर से विद्यालय परिसर में लगभग एक फीट ऊंचा एवं 100 से 125 मीटर लंबा फुटपाथ निर्माण कराने तथा पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।
मालपुरा (सच्चा सागर)। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कलमंडा परिसर में शुक्रवार को हुई बारिश के बाद जलभराव की समस्या के कारण छात्र-छात्राओं का कक्षा कक्ष तक पहुंचने का मार्ग बाधित हो गया। इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने जिला कलेक्टर को पत्र प्रेषित कर पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था एवं फुटपाथ निर्माण कराने की मांग की है। प्रधानाचार्य ने पत्र में बताया कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 3 जुलाई 2026 को हुई बारिश के बाद विद्यालय परिसर में एक फीट से अधिक पानी भर गया, जिससे परिसर के अंदर लगभग 100 से 125 मीटर तक का फुटपाथ जलमग्न हो गया। इसके कारण छात्र-छात्राओं एवं विद्यालय स्टाफ को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तथा शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रधानाचार्य ने बताया कि हर वर्ष जुलाई से सितंबर माह तक जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक कार्य बाधित होता है। उन्होंने जिला कलेक्टर से विद्यालय परिसर में लगभग एक फीट ऊंचा एवं 100 से 125 मीटर लंबा फुटपाथ निर्माण कराने तथा पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था करवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को इस समस्या का सामना न करना पड़े।
