सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई में धार्मिक कार्यक्रम, मुनि प्रभव सागर महाराज ने दिए प्रेरक उपदेश
निवाई। सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई के तत्वावधान में सन्त निवास नसियां जैन मंदिर में गुरुवार प्रातः धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। ज़िनोदय युवा ग्रुप एवं समाजजनों ने शांतिनाथ भगवान का अभिषेक एवं वृहद् शान्तिधारा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद आचार्य शांति सागर महाराज के चित्र समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। मंगलाचरण महिला मण्डल द्वारा प्रस्तुत किया गया।
जैन समाज के प्रवक्ता सुनील भाणजा और हितेश छाबड़ा ने बताया कि धर्मसभा में आचार्य वर्धमान सागर ससंघ के मुनि प्रभव सागर महाराज ने कहा कि जीवन की मूल समस्याओं का समाधान केवल अध्यात्म से संभव है। अध्यात्म मनुष्य की चेतना को अनंत ऊँचाई तक ले जाता है, जिसे आगम में निर्वाण और मोक्ष कहा गया है।
मुनिश्री ने कहा कि मन से वासना का बाण निकल जाना ही निर्वाण है और मोह का अभाव ही मोक्ष है। मोक्ष विरासत में नहीं मिलता, उसे पुरुषार्थ और श्रम से अर्जित करना पड़ता है। भगवान महावीर की श्रमण संस्कृति का संदेश है कि जो मिलेगा श्रम से मिलेगा। मुनिश्री ने कहा—मोक्ष प्रसाद से नहीं, प्रयास से मिलेगा; परमात्मा पूजा से नहीं, पुरुषार्थ से मिलेगा। केवल प्रार्थना पर्याप्त नहीं, प्रार्थना के साथ प्रयास अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि जीवन में मूल्य संपत्ति का नहीं, बल्कि व्यवहार, संबंध और प्रेम का है। वस्तु और व्यक्ति अच्छे-बुरे नहीं होते, बल्कि हमारा दृष्टिकोण उन्हें वैसा बनाता है। इसलिए दूसरों को बदलने से पहले अपने नजरिए को बदलें। उन्होंने बताया कि हमारा आचरण ही आगे आने वाली पीढ़ी को दिशा देता है, इसलिए आचरण ऐसा हो जो किसी का भविष्य खराब न करे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दोपहर में सामायिक, प्रतिक्रमण एवं स्वाध्याय हुआ। शाम को शांतिनाथ–चंदाप्रभु भगवान की आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।