निवाई उपखंड में ग्राम पंचायतें बढ़कर 52 हुईं, पर दतवास को पंचायत समिति न मिलने से ग्रामीणों में गहरी निराशा

 निवाई उपखंड में ग्राम पंचायतें बढ़कर 52 हुईं, पर दतवास को पंचायत समिति न मिलने से ग्रामीणों में गहरी निराशा 


विकास की रफ्तार यहाँ आधी कर दी गई-स्थानीयों की पीड़ा। 


रामबिलास लांगड़ी 


निवाई( सच्चा सागर) उपखंड में प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत 11 नई ग्राम पंचायतों के गठन के साथ अब कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 41 से बढ़कर 52 हो गई है। नए निर्णय से कई क्षेत्रों में उत्साह है, लेकिन दूसरी ओर उप तहसील दतवास को पंचायत समिति का दर्जा न मिलने से इलाके में निराशा और असंतोष स्पष्ट रूप से उभर आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दतवास की जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार, दूर-दराज़ के गाँवों की समस्याएँ और उप तहसील के रूप में इसकी स्थिति को देखते हुए पंचायत समिति की मांग पूरी तरह जायज़ थी। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से चली आ रही इस मांग को फिर नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दतवास पंचायत समिति बनती, तो क्षेत्र का प्रशासनिक बोझ कम होता, योजनाएँ समय पर लागू होतीं और आमजन की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही हो जाता। लेकिन यह फैसला हमारी उम्मीदों के उलट है। 


दूरी और देरी—दोनों बनेंगे बड़ी समस्या


दतवास क्षेत्र के कई गाँव निवाई पंचायत समिति से 25 से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में सरकारी कार्य, योजनाओं की स्वीकृति, प्रमाणन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएँ न सिर्फ समय लेने वाली होती हैं, बल्कि ग्रामीणों के लिए आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।विशेषज्ञों का मानना है कि दतवास पंचायत समिति बनने पर करीब 70 से 80 गाँवों को सीधा लाभ मिलता और विकास की गति कई गुना बढ़ती।


उप तहसील तो है , पर पंचायत समिति क्यों नहीं? 


स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब दतवास को उप तहसील का दर्जा दिया गया है, तो पंचायत समिति न बनाने की क्या बाधा रही? कई अन्य जिलों में पंचायत समिति पहले बनी और बाद में प्रशासनिक इकाइयों का विस्तार हुआ, इसलिए दतवास का मामला समझ से परे बताया जा रहा है।


दतवास में उठने लगी संगठित मांग


निर्णय के बाद से ही ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन दतवास को पंचायत समिति बनाने की दिशा में व्यापक आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि पूरी तरह विकास आधारित है।


निवाई उपखंड के लिए अधूरा निर्णय?


जहाँ एक ओर 11 नई ग्राम पंचायतों ने प्रशासनिक ढाँचे में मजबूती लाई है, वहीं दतवास को पंचायत समिति न मिलना क्षेत्र के लोगों के लिए सबसे बड़ी निराशा साबित हुआ है। ग्रामीणों का कहना है की  पंचायतें बढ़ीं, पर विकास का रास्ता हमारे लिए वही पुराना और लंबा रह गया। स्थानीय लोगों ने सरकार से पुनर्विचार की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि दतवास को पंचायत समिति घोषित करना न केवल प्रशासनिक रूप से उचित होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए आवश्यक भी है।

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