घटिया निर्माण के साथ सरकारी बिजली पर ठेकेदार की मौज
मालपुरा (सच्चा सागर)। उपखंड क्षेत्र में चल रही जायका योजना के तहत चांदसेन बांध की पक्की नहरों के निर्माण कार्य में घटिया निर्माण सामग्री उपयोग किए जाने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों एवं क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर मनमाने तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में नहरों की मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रही इस योजना में गुणवत्ता से समझौता किए जाने के आरोपों ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। जानकारी के अनुसार नहर निर्माण में उपयोग हो रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद कमजोर बताई जा रही है। इससे भविष्य में नहरों में पानी का रिसाव होने और निर्माण के कमजोर साबित होने की आशंका बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई तो करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। किसानों को भविष्य में सिंचाई संकट, पानी की बर्बादी और बार-बार मरम्मत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी डाक बंगले में ठेकेदार का राज, बिजली भी मुफ्त... जवाबदेही भी गायब!
वहीं मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है कि ठेकेदार द्वारा सिंचाई विभाग के सरकारी डाक बंगले को ही निर्माण सामग्री तैयार करने का केंद्र बना लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी परिसर में निजी निर्माण कार्यों के लिए मशीनें और सामग्री संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं, पिछले करीब दो वर्षों से सरकारी बिजली का खुलेआम उपयोग किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। लोगों का कहना है कि जहां आम जनता बिजली कटौती और बढ़ते बिलों से परेशान है, वहीं सरकारी संसाधनों का इस तरह निजी उपयोग गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के चलते सरकारी संसाधनों का खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि पहुंच रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी आम व्यक्ति द्वारा बिजली का मामूली दुरुपयोग भी किया जाए तो तुरंत कार्रवाई होती है, लेकिन यहां वर्षों से सरकारी बिजली और सरकारी परिसर का उपयोग होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं। ग्रामीणों एवं किसानों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन सकती है।

