पीपलू में मनरेगा पर सवाल : कागजों में दौड़ रहे काम, गांवों में मजदूर बैठे बेरोजगार!

पीपलू (सच्चा सागर)। गांवों में रोजगार देने के लिए शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर पीपलू पंचायत समिति क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से कई ग्राम पंचायतों में धरातल पर काम बंद पड़ा है, जबकि रिकॉर्ड में योजनाओं के संचालन की चर्चा जारी है। कई ग्राम पंचायतों मे तो मस्टररोल उठाकर मजदूर नही मिलने के बाहने बनाये जा रहे है। व नये मनरेगा जोबकार्ड भी जारी नही किऐ जा रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि एक समय गांवों में मनरेगा के तहत तालाब, सडक़, जल संरक्षण और अन्य विकास कार्यों से मजदूरों को रोजगार मिलता था, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि काम की तलाश में लोग पंचायतों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि मजदूरों के हाथ खाली हैं और रोजगार के इंतजार में कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब सरकार रोजगार योजनाओं के लिए बजट और घोषणाएं कर रही है तो गांवों में काम क्यों दिखाई नहीं दे रहे? लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो मजदूरों का पलायन बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायतवार मनरेगा कार्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए व जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्यवाही हो, ताकि यह साफ हो सके कि योजनाएं धरातल पर चल रही हैं या सिर्फ कागजों में।      


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने